स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻
भारत सरकार किसानों को आत्मनिर्भर और ऊर्जा-सक्षम बनाने के लिए अनेक योजनाएँ चला रही है। इन्हीं में से एक प्रमुख योजना है — प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम कुसुम योजना), जिसका उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा से सिंचाई करने की सुविधा प्रदान कर बिजली पर निर्भरता घटाना और आय में वृद्धि करना है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में यह योजना सफलतापूर्वक लागू की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को खेतों की सिंचाई हेतु सौर ऊर्जा चालित नलकूप (सोलर पम्प) लगाने पर 60 प्रतिशत तक का सरकारी अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
🌾 कुसुम योजना का लाभ किसानों तक
प्रदेश सरकार की इस योजना से किसानों को बिजली की समस्या से निजात मिल रही है। अब किसान अपनी खाली या बंजर भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर बिजली का उत्पादन और विक्रय कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहे हैं।
इस योजना के संचालन का दायित्व कृषि विभाग को सौंपा गया है, जो किसानों को आवेदन से लेकर स्थापना तक की संपूर्ण प्रक्रिया में सहायता प्रदान कर रहा है।
⚙️ सोलर पंप पर सरकारी अनुदान
भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के निर्देशों के अनुसार,
7.5 एचपी तक के स्टैंड-अलोन सोलर पंप की स्थापना पर—
- 30% केंद्रांश तथा
- 30% राज्यांश
मिलाकर कुल 60% अनुदान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशानुसार, प्रदेश सरकार ने 2 एचपी और 3 एचपी सोलर पंप पर राज्यांश बढ़ाकर किसानों को और अधिक लाभ उपलब्ध कराया है।
💧 किसानों को देय अंशदान (अनुदान पश्चात लागत)
| सोलर पंप की क्षमता | कुल लागत में किसान का अंशदान |
|---|---|
| 2 एचपी डीसी सरफेस (1800 वाट) | ₹28,376 |
| 3 एचपी डीसी सरफेस (3000 वाट) | ₹38,882 |
| 5 एचपी एसी समर्सिबल (4800 वाट) | ₹87,020 |
शेष धनराशि सरकार द्वारा वहन की जा रही है। किसान “पहले आओ–पहले पाओ” के आधार पर सोलर पंप हेतु ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
☀️ अब तक के परिणाम
अब तक प्रदेश में 93,062 सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। इससे—
- लगभग 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचन क्षमता बढ़ी है।
- प्रतिवर्ष 5,484 लाख यूनिट बिजली की बचत हो रही है।
- 1.26 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है।
- लाखों लीटर डीजल की बचत से किसानों का खर्च घटा है।
🌱 निष्कर्ष
पीएम कुसुम योजना प्रदेश के किसानों के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से क्रांतिकारी पहल सिद्ध हो रही है। सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई न केवल लागत घटा रही है बल्कि हर खेत को सिंचित करने की दिशा में स्थायी समाधान प्रदान कर रही है।
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