शाहजहाँपुर। उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी के पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन के दूरदर्शी विजन के अनुरूप जनपद की विलुप्तप्राय जलधराओं को नया जीवन देने का विधिक अभियान अत्यंत तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। शासन की महत्वाकांक्षी योजना **“दस वर्ष, एक जनपद–एक नदी”** कार्यक्रम के अंतर्गत ऐतिहासिक **भैंसी नदी के पुनर्जीवन का कार्य** कलेक्टोरेट प्रशासन, स्थानीय निकायों तथा भारी जनसहयोग के अद्भुत विधिक व व्यावहारिक समन्वय से धरातल पर इतिहास रच रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) **श्री अरविंद कुमार** ने ग्राम पंचायत नवादा दह से लेकर उलेनापुर धारा तक चल रहे नदी पुनरुद्धार महा-अभियान का सघन स्थलीय निरीक्षण किया और तकनीकी बारीकियों को परखा।
ग्राउंड जीरो पर विधिक प्रगति की जानकारी देते हुए अपर जिलाधिकारी (वि० एवं रा०) अरविंद कुमार ने बताया कि भैंसी नदी की **लगभग 25 किलोमीटर लंबी दूसरी मुख्य धारा** को पुनर्जीवित करने के लिए महा-खुदाई का कार्य कराया जा रहा है। इस पुनरुद्धार अभियान का विधिक शुभारंभ गत 08 मई 2026 को जिलाधिकारी **श्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह** द्वारा किया गया था। प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते बेहद अल्प समय में ही **लगभग 14 किलोमीटर क्षेत्र में नदी की री-चैनलिंग और गाद निकालने का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण** कराया जा चुका है, जो विभागीय समन्वय की उत्कृष्ट मिसाल है।
| 📊 अभियान की वर्तमान विधिक व तकनीकी प्रगति | ⏱️ कलेक्ट्रेट कमान द्वारा जारी समय-बद्ध अल्टीमेटम |
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• कुल लक्ष्य लंबाई: लगभग २५ किलोमीटर लंबी दूसरी जलधारा का कायाकल्प। • वर्तमान उपलब्धि: अब तक १४ किलोमीटर का सिल्ट-सफाई व विधिक अर्थवर्क पूर्ण। • भारी मशीनरी का बेड़ा: नदी के प्राकृतिक प्रवाह को सुगम बनाने हेतु १० भारी जेसीबी (JCB) मशीनें चौबीसों घंटे धरातल पर कार्यरत। |
• ५ कार्यदिवसों का अल्टीमेटम: एडीएम ने शेष ११ किलोमीटर के कार्य को आगामी ५ दिनों के भीतर पूर्ण गुणवत्ता के साथ पूरा करने के कड़े निर्देश दिए। • वर्षा ऋतु से पूर्व का लक्ष्य: मानसून के आगमन और पहली बारिश से पहले नदी के विधिक व स्पष्ट स्वरूप को पूरी तरह विकसित करना अनिवार्य किया गया है। |
भैंसी नदी के कायाकल्प को लेकर नदी तट पर बसे दर्जनों गांवों के किसानों और ग्रामीणों में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। निरीक्षण के दौरान भारी संख्या में उपस्थित प्रबुद्ध ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों का स्वागत किया। ग्रामीणों का मानना है कि इस नदी के पुनर्जीवित होने से क्षेत्र का भूगर्भ जलस्तर (वाटर टेबल) सुदृढ़ होगा, जिससे सिंचाई की विधिक विसंगतियां दूर होंगी और डार्क ज़ोन में जा रहे कुएं व नल पुनर्जीवित हो उठेंगे। एडीएम ने लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के विधिक समन्वयकों को निर्देशित किया कि नदी की पटरियों पर वृहद वृक्षारोपण की विधिक कार्ययोजना भी तुरंत तैयार की जाए।
"माननीय मुख्यमंत्री जी का 'एक जनपद–एक नदी' कार्यक्रम शाहजहाँपुर के लिए एक विधिक और पर्यावरणीय वरदान है। पूर्व में 20 तारीख तक कार्य को एक संतोषजनक और सुदृढ़ स्थिति में लाने का विधिक लक्ष्य रखा गया था, जिसे हमारी टीम ने काफी हद तक प्राप्त कर लिया है। लेकिन अब समय अत्यंत मूल्यवान है। मानसून पूर्व की तैयारियों को देखते हुए हमें इस अभियान को और अधिक गति देनी होगी। निर्माण और खुदाई कार्य की गुणवत्ता में कोई भी ढिलाई विधिक रूप से अक्षम्य होगी। खंड विकास अधिकारियों और लेखपालों की यह विधिक जिम्मेदारी है कि वे स्वयं मौके पर रहकर इसकी दैनिक निगरानी करें।"
स्थलीय विधिक निरीक्षण के इस महत्वपूर्ण दौर के दौरान कसमंडा व पुवायाँ अंचलों से जुड़े खंड विकास अधिकारी (BDO) **श्री मनीष दत्त**, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी संजय पाठक, गर्गवार, संबंधित क्षेत्रीय राजस्व लेखपालों की विधिक विंग सहित भारी संख्या में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जागरूक कृषक मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कलेक्ट्रेट जनसुनवाई सेल और जिला विकास पटल से प्राप्त सूचना के अनुसार, नदी के मुहाने और मोड़ों पर वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप सुरक्षा तटबंध भी बनाए जा रहे हैं ताकि बाढ़ जैसी विसंगतियों से कृषि भूमि को विधिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।
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