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लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा फैसला; प्रदेश के सभी ७५ जिलों में...

 

💼 कलेक्ट्रेट सुशासन एवं श्रम कल्याण / मुख्यमंत्री उच्च स्तरीय समीक्षा
✍️ स्टेट ब्यूरो हेड: योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश
📅 लखनऊ | 23 मई, 2026
🌐 सच की आवाज वेब न्यूज — श्रम एवं सेवायोजन प्रभाग विशेष: 'सेवामित्र व्यवस्था' से सरकारी विभागों में आएगी पारदर्शिता, औद्योगिक नगरों में व्यवस्थित बनेंगे हाई-टेक 'लेबर अड्डे'

खनऊ। उत्तर प्रदेश के युवाओं को वैश्विक फलक पर रोजगार से जोड़ने, कलेक्ट्रेट श्रम सुरक्षा ग्रिड को सुदृढ़ करने तथा अंतिम छोर पर खड़े श्रमिक परिवारों को सुशासन की मुख्य धारा में शामिल करने हेतु राज्य सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में है। आज राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री **योगी आदित्यनाथ जी** ने श्रम एवं सेवायोजन विभाग के विधिक कार्यों की सघन उच्च स्तरीय समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि श्रमिक केवल उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रगति की सबसे अभेद्य विधिक शक्ति हैं। सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि श्रमिकों, युवाओं और कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित कार्य वातावरण और पारदर्शी रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाएं।

🚫 बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में चलेगा विशेष विधिक अभियान, शिक्षा से नहीं थमेंगे कदम:

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री जी ने एक ऐतिहासिक विधिक निर्णय लेते हुए **'बाल श्रमिक विद्या योजना'** को नए कड़े प्रावधानों के साथ प्रदेश के सभी **७५ जनपदों** में विस्तृत रूप से लागू करने के नोडल निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोई भी मासूम बच्चा आर्थिक विवशता या पारिवारिक गरीबी के कारण शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रहना चाहिए। बाल श्रम प्रभावित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष रेस्क्यू अभियान चलाकर बच्चों को सीधे विद्यालयों से जोड़ा जाए तथा उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। निजी औद्योगिक प्रभागों के सहयोग से इन बच्चों के दीर्घकालिक कौशल विकास (Skill Development) की ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

📜 मुख्यमंत्री समीक्षा बैठक के मुख्य विधिक निर्देश एवं रोजगार सुशासन चार्ट:
📊 डिजिटल अवसंरचना एवं कल्याणकारी कमान ⚙️ धरातलीय क्रियान्वयन एवं रोजगार सृजन मॉडल
रोजगार संगम पोर्टल उन्नयन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिजिटल सेवाएं, रीयल-टाइम जॉब मैचिंग व ऑनलाइन काउंसलिंग का समावेशन।
बाल श्रमिक विद्या योजना: अब प्रदेश के सभी ७५ जिलों में एक समान विधिक कस्टडी सुरक्षा के साथ संचालित होगी।
आधुनिक सेवायोजन तंत्र: कलेक्ट्रेट रोजगार विंग को भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप पूरी तरह पेपरलेस व डिजिटल करने का लक्ष्य।
सेवामित्र मॉडल: कुशल कामगारों के लिए अभिनव तकनीक आधारित रोजगार व्यवस्था, सरकारी विभागों में भी होगा अनिवार्य उपयोग।
श्रमिक सुविधा केंद्र: सभी प्रमुख औद्योगिक नगरों में 'लेबर अड्डों' को सर्वसुविधायुक्त सहायता केंद्रों के रूप में व्यवस्थित करने के निर्देश।
रोजगार के आयाम: प्रदेश के युवाओं को स्थानीय (Local), राष्ट्रीय (National) तथा वैश्विक (Global) स्तर पर विधिक प्लेसमेंट सुरक्षा।
🛡️ 'सेवामित्र व्यवस्था' से दूर होगी बिचौलिया संस्कृति, विभागों में बढ़ेगी पूर्ण पारदर्शिता:

मुख्यमंत्री जी ने **'सेवामित्र व्यवस्था'** को रोजगार सृजन और जनसुविधा प्रबंधन का एक उत्कृष्ट और अभिनव मॉडल बताते हुए कहा कि ऐसी तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्थाएं युवाओं और कुशल कारीगरों के लिए सीधे आर्थिक समृद्धि के द्वार खोलती हैं। कलेक्ट्रेट के विभिन्न पटल प्रभागों और सरकारी विभागों में भी आवश्यकतानुसार इस व्यवस्था के उपयोग के प्रस्ताव को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे आउटसोर्सिंग व संविदा कार्यों में भ्रष्टाचार की विसंगतियां पूरी तरह समाप्त होंगी, पारदर्शिता बढ़ेगी तथा स्थानीय अंचलों में बंपर रोजगार सृजित होंगे।

🏢 औद्योगिक शहरों के 'लेबर अड्डे' अब केवल एकत्रीकरण स्थल नहीं, बल्कि बनेंगे सहायता केंद्र:

निर्माण क्षेत्र से जुड़े दैनिक दिहाड़ी श्रमिकों के हितों की रक्षा हेतु मुख्यमंत्री ने सभी औद्योगिक शहरों में प्रस्तावित श्रमिक सुविधा केंद्रों (**लेबर अड्डों**) को अत्यंत व्यवस्थित रूप से विकसित करने की विधिक कमान सौंपी। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि इन केंद्रों को केवल श्रमिकों के सुबह जमा होने वाले साधारण स्थल के रूप में न देखा जाए, बल्कि यहाँ श्रमिकों के लिए विश्राम कक्ष, शुद्ध पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और कलेक्ट्रेट कल्याणकारी योजनाओं के पंजीकरण पटल (Help Desks) का समावेशन अनिवार्य रूप से किया जाए।

रोजगार सृजन और पारदर्शी डिजिटल सर्विलांस ही हमारी विकास यात्रा की सर्वोच्च प्राथमिकता है

"उत्तर प्रदेश की प्रगति का मूल आधार हमारे युवा और श्रमिक भाई-बहन हैं। सेवायोजन विभाग को पुराने ढर्रे से बाहर निकालकर एक आधुनिक, डिजिटल और रीयल-टाइम एम्प्लॉयमेंट इकोसिस्टम में तब्दील किया जाए। रोजगार संगम पोर्टल पर AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित सेवाओं को सुदृढ़ किया जाए ताकि युवाओं को उनकी विधिक योग्यता के अनुसार घर बैठे ही ग्लोबल कंपनियों में नौकरी के अवसर मिल सकें। बाल श्रम एक सामाजिक विसंगति है, जिसे पूरी तरह कुचलने के लिए कलेक्ट्रेट राजस्व, श्रम विभाग और जिला पुलिस कमान आपसी समन्वय स्थापित कर धरातल पर कड़ा एक्शन लें।" — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, शाहजहाँपुर, मुरादाबाद, बरेली, बिसवां और सीतापुर सहित राज्य के विभिन्न अंचलों के सम्मानित प्रबुद्ध नागरिकों, छात्र संगठनों, औद्योगिक एसोसिएशनों और श्रमिक यूनियनों ने मुख्यमंत्री द्वारा तकनीक आधारित रोजगार और बाल श्रम उन्मूलन के इस कड़े विधिक रोडमैप की खुले दिल से सराहना की है। कलेक्ट्रेट जनसुनवाई पटल और जिला श्रम कल्याण अधिकारियों ने पुनः समस्त जागरूक नागरिकों व अभिभावकों से विधिक अपील की है कि वे बाल श्रम के खिलाफ सुशासन राज का सहयोग करें। यदि अंचल में कहीं भी होटलों, ढाबों या कारखानों में मासूम बच्चों से विसंगतिपूर्ण तरीके से श्रम कराया जा रहा हो, तो इसकी गुप्त विधिक प्रविष्टि तत्काल नोडल चाइल्ड हेल्पलाइन '१०९८' या श्रम विभाग के डिजिटल पोर्टल पर दर्ज कराएं, ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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📈 सुदृढ़ श्रम कल्याण, सुरक्षित युवा — तकनीक आधारित रोजगार तंत्र, बाल श्रम का पूर्ण विधिक उन्मूलन और जन-जन के अभेद्य आर्थिक व सामाजिक हितों के संरक्षण के विधिक संकल्प के साथ सदैव समर्पित उत्तर प्रदेश शासन।

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