बरेली/शाहजहाँपुर। उत्तर प्रदेश में जारी चिलचिलाती धूप, भीषण उमस और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी (हिट वेव) के प्रकोप को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग एवं विश्वविद्यालय प्रशासनों ने छात्र-छात्राओं तथा प्राध्यापकों के स्वास्थ्य संवर्धन हेतु कड़े व सुधारात्मक विधिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में **महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय** (MJPRU) प्रशासन द्वारा शैक्षिक सत्र 2025-26 को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। माननीय कुलपति महोदय के सीधे दिशा-निर्देशानुसार विश्वविद्यालय मुख्य परिसर तथा राज्य के विभिन्न जनपदों में संचालित सभी संबद्ध महाविद्यालयों में आधिकारिक रूप से **ग्रीष्मावकाश (Summer Vacation) की घोषणा** कर दी गई है। कुलसचिव पटल से जारी अधिसूचना के अनुसार यह ग्रीष्मकालीन अवकाश आगामी २५ मई से प्रभावी होकर ४ जुलाई तक लागू रहेगा।
विश्वविद्यालय के विधिक पटल द्वारा जारी पत्रक में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ग्रीष्मावकाश के बावजूद पूर्व निर्धारित मुख्य व सेमेस्टर परीक्षाएं अपने तय टाइम-टेबल के अनुसार **पूरी तरह से यथावत संचालित** होती रहेंगी। परीक्षा संबंधी अनिवार्य विधिक कार्यों (जैसे कक्ष निरीक्षण, मूल्यांकन व कंट्रोल रूम कमान) में लगे समस्त सम्मानित शिक्षकों, कुलसचिव कार्यालय के कर्मचारियों और प्रबंधकीय स्टाफ से यह विधिक अपेक्षा की गई है कि वे अवकाश अवधि में भी आवश्यकतानुसार अपना पूर्ण प्रशासनिक योगदान देना सुनिश्चित करेंगे।
| ⏱️ ग्रीष्मकालीन अवकाश विधिक समयावधि | ⚖️ शिक्षकों व परीक्षा कमान हेतु विधिक सेवा नियम |
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• अवकाश प्रारंभ तिथि: 25 मई, 2026 (सोमवार अंचल)। • अवकाश समापन तिथि: 04 जुलाई, 2026 तक परिसर पूर्णतः बंद। • पुनः खुलने का सत्र: 05 जुलाई, 2026 से नियमित विधिक कक्षाएं सुचारू। |
• एक के बदले एक प्रतिकर अवकाश: अवकाश अवधि में परीक्षा ड्यूटी करने वाले शिक्षकों के हितों की रक्षा हेतु **प्रतिकर अवकाश (Compensatory Leave)** देने का विधिक निर्देश। • महाविद्यालय स्तर पर अनुपालन: संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों को पटल पर यह सुनिश्चित करने का विधिक दायित्व सौंपा गया है। |
विश्वविद्यालय सांख्यिकी विंग और कुलसचिव कार्यालय से प्राप्त पत्रावली विवरण के अनुसार, इस निर्णय के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक उत्कृष्ट प्रशासनिक संतुलन कायम किया है। एक ओर जहाँ भीषण लू और पारे के ४५ डिग्री सेल्सियस पार जाने के बीच विद्यार्थियों व प्राध्यापकों को घर पर रहकर ग्रीष्मकालीन विसंगतियों से बचने की विधिक राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर छात्रों के अकादमिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए परीक्षाओं की विधिक सुचारुता में कोई बाधा नहीं आने दी गई है। सभी विभागाध्यक्षों और संबद्ध प्राचार्यों को कड़े विधिक निर्देश दिए गए हैं कि वे अवकाश का अनुपालन कराते समय परीक्षा केंद्रों पर पेयजल व ओआरएस पटल की समुचित व्यवस्था अनिवार्य रूप से रखें।
"शैक्षिक सत्र २०२५-२६ के कैलेंडर के विधिक अनुपालन और उत्तर प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप यह निर्णय लिया गया है। ग्रीष्मावकाश के दौरान परिसर पूरी तरह बंद रहेगा, लेकिन छात्र-छात्राओं की परीक्षाओं की विधिक विश्वसनीयता बनाए रखने हेतु हमारी परीक्षा विंग, फ्लाइंग स्क्वाड और सर्विलांस नोडल टीमें परीक्षा केंद्रों पर पूरी कड़ाई से सक्रिय रहेंगी। जो शिक्षक इस भीषण तपन में स्वेच्छा व विभागीय आदेश से परीक्षा कार्य संपादित करा रहे हैं, उनके विधिक हितों का ध्यान रखते हुए कलेक्ट्रेट नियमावली के तहत प्रतिकर अवकाश की व्यवस्था पटल पर लागू कर दी गई है। किसी भी संबद्ध संस्थान द्वारा इस आदेश की अवहेलना करने पर विधिक संस्तुति बोर्ड को भेजी जाएगी।" — विश्वविद्यालय प्रशासनिक सूत्र
रूहेलखंड विश्वविद्यालय अंचल, बरेली मंडल, शाहजहाँपुर कलेक्ट्रेट शिक्षा अनुभाग और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के प्रबुद्ध प्राध्यापक संघों, अशासकीय कॉलेज शिक्षक यूनियनों और सम्मानित छात्र कल्याण समितियों ने कुलपति के इस समयोचित, पारदर्शी और संवेदनशीलता से परिपूर्ण विधिक आदेश का खुले दिल से स्वागत किया है। विशेष रूप से स्ववित्तपोषित (Self-Financed) कॉलेजों के प्राध्यापकों के लिए प्रतिकर अवकाश की विधिक व्यवस्था एक बड़ी राहत बनकर आई है। कलेक्ट्रेट जनसुनवाई पटल और विश्वविद्यालय परीक्षा नियंत्रक सेल ने पुनः समस्त प्रबुद्ध परीक्षार्थियों से विधिक अपील की है कि वे ग्रीष्मावकाश का उपयोग अपने आगामी प्रश्नपत्रों की उत्कृष्ट तैयारी हेतु करें तथा परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश-पत्र व वैध प्रपत्रों के साथ विधिक समय से पूर्व उपस्थित होकर पारदर्शी शिक्षा सुशासन की स्थापना में कमान का सहयोग करें।
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