शाहजहाँपुर। हालांकि आधुनिक जीवनशैली में वाहनों की निर्भरता अत्यधिक बढ़ चुकी है, लेकिन पर्यावरण की विसंगतियों से निपटने, कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त वातावरण तैयार करने की दिशा में स्वामी शुकदेवानन्द विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक विधिक महा-अभियान का शंखनाद किया है। ऊर्जा संरक्षण, ईंधन बचत तथा पर्यावरण सुरक्षा के विधिक सिद्धांतों को धरातल पर क्रियान्वित करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से समस्त छात्र-छात्राओं, सम्मानित प्राध्यापकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए एक विशेष विधिक अपील जारी की गई है। माननीय कुलपति **प्रोफेसर पुष्पेंद्र बहादुर सिंह** (प्रो. पी. बी. सिंह) के कुशल मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय परिसर को 'पूर्णतः हरित एवं आत्मनिर्भर' बनाने की दिशा में यह एक बेहद सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय मुख्यालय पटल से प्राप्त प्रशासनिक सूचना के अनुसार, कैम्पस में **“नो-व्हीकल फ्राइडे”** अभियान का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया गया है। इसके अंतर्गत प्रत्येक शुक्रवार को पेट्रोल, डीजल एवं गैस आधारित निजी वाहनों के न्यूनतम अथवा शून्य उपयोग की विधिक अपील की गई है। इसके स्थान पर विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों से कार-पूलिंग (साझा वाहन व्यवस्था), सार्वजनिक परिवहन के साधनों (बसों, ई-रिक्शा) तथा आधुनिक **ई-वाहनों (EVs)** के अधिकाधिक प्रयोग पर बल देने को कहा गया है, ताकि परिसर की वायु गुणवत्ता को अक्षुण्ण रखा जा सके।
| 📊 पर्यावरण संरक्षण एवं ईंधन बचत के विधिक बिंदु | ⏱️ स्वस्थ जीवनशैली एवं कलेक्ट्रेट पर्यावरण विंग मानक |
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• न्यूनतम carbon उत्सर्जन: शुक्रवार को जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) आधारित मोटर गाड़ियां परिसर पटल पर प्रतिबंधित श्रेणी में रहेंगी। • साझा समावेशन (Car Pooling): एक ही रूट से आने वाले शिक्षकों व कर्मचारियों द्वारा वाहनों के विधिक साझाकरण को प्रोत्साहन। • ई-इन्फ्रास्ट्रक्चर: परिसर के भीतर पर्यावरण-अनुकूल साइकिल स्टैंड्स और ई-व्हीकल चार्जिंग पॉइंट्स का विधिक सुदृढ़ीकरण। |
• शारीरिक दक्षता: छोटी दूरियों और अंतर-विभागीय आवागमन के लिए **पैदल चलने अथवा साइकिल का उपयोग** करने का विधिक संदेश। • स्वास्थ्य लाभ: नियमित पैडलिंग और पैदल चलने से हृदय स्वास्थ्य में सुधार और तनाव (वर्क स्ट्रेस) में आंशिक कमी। • आत्मनिर्भर भारत विज़न: अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं जन-सहभागिता के बल पर परिसर को प्रदूषण मुक्त बनाने का कड़ा लक्ष्य। |
विश्वविद्यालय प्रशासन के इस अभिनव और युगांतरकारी प्रयास का शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों द्वारा खुले दिल से स्वागत किया गया है। शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थान समाज के लिए लाइट-हाउस (प्रकाश स्तंभ) होते हैं; ऐसे में यदि विश्वविद्यालय स्वयं आगे बढ़कर पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देगा, तो निस्संदेह समाज में एक व्यापक और सकारात्मक विधिक संदेश जाएगा। कलेक्ट्रेट सांख्यिकी पटल और वन विभाग के स्थानीय नोडल समन्वयकों ने भी इस अभियान की सराहना करते हुए इसे 'स्वच्छ, हरित एवं आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर बताया है।
"स्वामी शुकदेवानन्द विश्वविद्यालय केवल उच्च शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक संस्कारों और विधिक नागरिक उत्तरदायित्वों की जननी है। भीषण उमस और लगातार बढ़ रहा तापमान इस बात का विधिक संकेत है कि हमें प्रकृति के संरक्षण हेतु तत्काल धरातल पर कठोर कदम उठाने होंगे। 'नो-व्हीकल फ्राइडे' हमारे आत्म-अनुशासन की एक विधिक परीक्षा है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा विश्वविद्यालय परिवार अपनी स्वेच्छा और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर इस पर्यावरण-अनुकूल अभियान को देश के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक आदर्श मॉडल बनाएगा। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वायु और सुरक्षित वातावरण सौंपना ही हमारा विज़न है।" — कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह
इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव, विभिन्न ७ संकायों के सम्मानित संकायाध्यक्ष (डीन), विभागाध्यक्ष और छात्र कल्याण विंग के नोडल समन्वयकों ने कलेक्ट्रेट पर्यावरण सेल के मानकों के अनुरूप परिसर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करने का भी विधिक खाका तैयार किया है। विश्वविद्यालय जनसूचना सेल ने समस्त छात्र-छात्राओं से विधिक अपील की है कि वे इस हरित महा-अभियान के सक्रिय एंबेसडर बनें, सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को परिसर पटल पर पूरी तरह प्रतिबंधित रखें तथा अपनी दैनिक जीवनशैली में जल व ऊर्जा संरक्षण के विधिक नियमों को आत्मसात कर सुशासन और पर्यावरण संरक्षण की इस साझी विधिक लड़ाई को सफल बनाएं।
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