लखनऊ। राजधानी के पॉश इलाके गोमतीनगर अंचल में एक सनसनीखेज महिला हत्याकांड से सनसनी फैल गई। संगम नगर व कलेक्ट्रेट आउटर विंग के तहत हुई इस वारदात का गोमतीनगर थाना पुलिस ने त्वरित गति से सर्विलांस का उपयोग करते हुए मात्र २४ घंटे के भीतर सफल अनावरण कर दिया है। पुलिस टीम ने विवाहिता महिला की गला दबाकर निर्मम हत्या करने वाले मुख्य नामजद आरोपी प्रेमी को विधिक रूप से गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस कमिश्नरेट पूर्वी जोन के उच्चाधिकारियों के सीधे निर्देशन और कड़े सर्विलांस के बल पर हुई इस त्वरित विधिक कार्रवाई की क्षेत्र में व्यापक सराहना की जा रही है।
थाना पुलिस ऑफिस से प्राप्त आधिकारिक विधिक विवरण के अनुसार, मृतका निशा देवी (पत्नी दीपक कुमार) गोमतीनगर के ग्वारी गांव (विकासखण्ड-४) स्थित एक किराए के मकान में निवास करती थी। कस्टडी में लिए गए अभियुक्त **दीपांशु सिंह** ने विधिक पूछताछ में स्वीकार किया कि मृतका के साथ उसकी वर्ष २०२४ से प्रगाढ़ मित्रता थी, जब वे दोनों **नोवा हॉस्पिटल, गोमतीनगर** में एक साथ कार्य करते थे। निशा देवी पूर्व से विवाहित थी, जबकि अभियुक्त दीपांशु सिंह का विवाह जनवरी २०२६ में हुआ था। शादी के बाद से ही निशा देवी द्वारा दीपांशु पर अपनी पत्नी को छोड़कर उसके साथ विधिक रूप से रहने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था, जिससे दोनों के मध्य गहरे मतभेद उत्पन्न हो गए थे।
| 👤 गिरफ्तार मुख्य अभियुक्त का प्रोफाइल | ⚖️ पंजीकृत केस, समय व विधिक विवरण |
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• नाम: दीपांशु सिंह पुत्र धर्मेंद्र सिंह • उम्र: करीब ३० वर्ष • हाल का पता: 537F/162ए, वैदिक गार्डन, इन्द्रपुरी कॉलोनी, आईआईएम मुबारकपुर, थाना मड़ियांव, सीतापुर रोड, लखनऊ। • मूल पता: ग्राम जनीगांव, थाना अतरौली, तहसील संदीला, जनपद हरदोई। |
• शिकायतकर्ता: श्री रामदास (विनयखण्ड, गोमतीनगर) • विधिक अभियोग: मु०अ०सं० 194/2026 अंतर्गत **धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता (BNS)** (हत्या के परिप्रेक्ष्य में)। • गिरफ्तारी का समय: २२ मई, २०२६ को दोपहर समय करीब १२:४० बजे। • आपराधिक इतिहास: नवीन पंजीकृत मर्डर केस सहित अन्य थानों से आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है। |
पुलिस पटल के अनुसार, विगत १९ मई २०२६ को ग्वारी गांव स्थित मृतका के कमरे पर इसी विषय को लेकर दोनों के मध्य भयंकरक विवाद और कहासुनी हुई थी। विवाद अत्यधिक बढ़ने पर आरोपी दीपांशु सिंह ने आवेश में आकर निशा देवी का गला घोंट दिया, जिससे दम घुटने के कारण मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद शातिर अभियुक्त घर का दरवाजा बाहर से बंद कर फरार हो गया था। मृतका के ससुर श्री रामदास निवासी विनयखण्ड द्वारा २२ मई को थाने पर लिखित तहरीर प्रस्तुत किए जाने के बाद पुलिस ने त्वरित विधिक साक्ष्य (तकनीकी गवाही और टावर डंप डेटा) एकत्र कर आरोपी को दबोचने में अभूतपूर्व विधिक सफलता प्राप्त की।
👮 प्रभारी निरीक्षक ब्रजेश चंद्र तिवारी के नेतृत्व में महिला व पुरुष विंग का साझा गुड वर्क:इस खौफनाक और जटिल मर्डर मिस्ट्री का रिकॉर्ड समय में अनावरण करने वाली गोमतीनगर पुलिस टीम में मुख्य रूप से **प्रभारी निरीक्षक श्री ब्रजेश चंद्र तिवारी**, **उपनिरीक्षक श्री मारूफ आलम**, **उपनिरीक्षक श्री प्रेम कुमार** एवं **उपनिरीक्षक श्री दिलीप कुमार** शामिल रहे। पुलिस विंग द्वारा अभियुक्त की विधिक निशानदेही पर घटना से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य कस्टडी में ले लिए गए हैं तथा पत्रावली पूर्ण कर आरोपी को रिमांड हेतु सक्षम माननीय न्यायालय के सम्मुख पेश किया जा रहा है।
"लखनऊ कमिश्नरेट के अंतर्गत जघन्य अपराधों और महिला सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों के खिलाफ पूर्णतः शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति विधिक रूप से लागू है। गोमतीनगर पुलिस ने सूचना मिलते ही तकनीकी गवाही और फॉरेंसिक साक्ष्यों का सटीक समन्वय कर अभियुक्त दीपांशु सिंह को मात्र १२ घंटे के भीतर विधिक रूप से ट्रैप कर लिया। अभियुक्त के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत कठोर विधिक चार्जशीट न्यायालय पटल पर प्रेषित की जाएगी। हमारा विज़न स्पष्ट है कि किसी भी अपराधी को विधिक विसंगति का लाभ न मिले और पीड़िता के परिजनों को त्वरित व पूर्ण विधिक न्याय सुनिश्चित कराया जा सके।" — पुलिस कमान जोन-पूर्वी विज़िट नोट
ग्वारी गांव, विनयखण्ड और समूचे गोमतीनगर अंचल के सम्मानित प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक महिला सुरक्षा संगठनों और स्थानीय रहवासी वेलफेयर सोसायटियों ने लखनऊ पुलिस की इस त्वरित, पारदर्शी और अभूतपूर्व विधिक मुस्तैदी की खुले दिल से सराहना की है। पुलिस कमान ने पुनः समस्त जागरूक नागरिकों से विधिक अपील की है कि वे किराएदारों का विधिक कलेक्ट्रेट/पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से कराएं तथा अपने आस-पास होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि, घरेलू विसंगति या अराजकता की गुप्त विधिक सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस ऑफिस या 'यूपी ११२' पर दर्ज कराएं, ताकि आपसी समन्वय से सुरक्षित राजधानी का वातावरण हमेशा अक्षुण्ण बना रहे।
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