लखनऊ। राजधानी के प्रतिष्ठित और रसूखदार निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों के विधिक व आर्थिक शोषण पर जिला प्रशासन ने अत्यंत कड़ा और दंडात्मक रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्ट्रेट सभागार में **जिला शुल्क नियामक समिति** की एक अत्यंत महत्वपूर्ण व उच्च स्तरीय विधिक बैठक संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता स्वयं जिलाधिकारी (DM) लखनऊ द्वारा की गई। बैठक के दौरान **फीस विनियमन अधिनियम संशोधन 2020** के कड़े प्रावधानों के तहत निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा वसूले जा रहे अवैध शुल्कों की विस्तृत विधिक स्क्रूटनी की गई। जांच में दोषी पाए गए स्कूलों के विरुद्ध जिला कलेक्ट्रेट कमान द्वारा दंडात्मक नोटिस जारी कर विधिक कार्रवाई तेज कर दी गई है।
विधिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजधानी के कुल 20 नामचीन निजी स्कूलों के खिलाफ अवैध रूप से फीस वृद्धि करने और अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करने के संबंध में कुल 28 गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जिला स्तरीय विधिक जांच कमेटी द्वारा जब इन पत्रावलियों की सूक्ष्मता से जांच की गई, तो प्राथमिक रूप से **8 शिकायतें पूरी तरह सत्य और विधिक रूप से विसंगतिपूर्ण पाई गईं**। जांच आख्या सामने आते ही जिला प्रशासन ने संबंधित स्कूलों की मनमानी को रोकने हेतु कड़ा चाबुक चलाया है।
| 🏛️ दोषी स्कूलों के विरुद्ध विधिक दंडात्मक प्रहार | ⏱️ प्रशासनिक अल्टीमेटम व विधिक राहत |
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• ८ स्कूलों को भारी जुर्माना: फीस विनियमन अधिनियम के विधिक मापदंडों के उल्लंघन पर 8 बड़े निजी स्कूलों को **५-५ लाख रुपये जुर्माने** का कारण बताओ नोटिस जारी। • २ स्कूलों ने मांगी माफी: जांच के दौरान दो प्रमुख स्कूलों ने अपनी विधिक गलती स्वीकार करते हुए वसूले गए अतिरिक्त शुल्क को आगामी महीनों की फीस में **समायोजन (Adjustment) करने का लिखित आश्वासन** कलेक्ट्रेट पटल को दिया। |
• १ जून २०२६ की अंतिम तिथि: नोटिस प्राप्त समस्त ८ संबंधित स्कूलों को अपनी विधिक सफाई और पक्ष रखने के लिए **1 जून 2026 तक का अंतिम समय** दिया गया है। • एकतरफा विधिक कार्रवाई: यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रबंधन द्वारा संतोषजनक विधिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए, तो बिना किसी रियायत के भारी वित्तीय रिकवरी और मान्यता निरस्तीकरण की विधिक संस्तुति बोर्ड को भेजी जाएगी। |
बैठक के एजेंडे की विधिक व्याख्या करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DIOS) एवं बुनियादी शिक्षा विंग के नोडल समन्वयकों ने स्पष्ट किया कि फीस विनियमन अधिनियम संशोधन 2020 के अंतर्गत कोई भी निजी स्कूल त्रैमासिक या वार्षिक आधार पर तय सीमा से अधिक और बिना विधिक ऑडिट के विकास शुल्क या अन्य गुप्त मदों में धनराशि नहीं वसूल सकता। जिला प्रशासन द्वारा गठित फ्लाइंग स्क्वाड और सर्विलांस टीमें अब इन स्कूलों के वित्तीय खातों की विधिक जांच करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि त्रुटि सुधारने वाले दोनों स्कूल वास्तविक रूप से अभिभावकों का पैसा समायोजित कर रहे हैं या नहीं।
"राजधानी लखनऊ में शिक्षा व्यवस्था की आड़ में व्यावसायिक लूटपाट और फीस विनियमन अधिनियम की अवहेलना किसी भी विधिक कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला शुल्क नियामक समिति अभिभावकों के अधिकारों की रक्षा हेतु पूरी तरह विधिक रूप से प्रतिबद्ध है। १ जून २०२६ तक पक्ष न रखने वाले या विधिक विसंगतियों को न सुधारने वाले स्कूलों के बैंक खातों और प्रबंधकीय संपत्तियों की जांच कर उत्तर प्रदेश शिक्षा बोर्ड को उनकी विधिक मान्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की संस्तुति कलेक्ट्रेट पटल से प्रेषित की जाएगी। हमारा विधिक विजन स्पष्ट है कि प्रत्येक छात्र को पारदर्शी और सुलभ शिक्षा मिले।" — कलेक्ट्रेट विधिक कमान सूत्र
लखनऊ के विभिन्न प्रबुद्ध अभिभावक संघों, नागरिक मंचों और छात्र कल्याण समितियों ने जिलाधिकारी के इस साहसिक, पारदर्शी और ऐतिहासिक विधिक निर्णय का दिल से स्वागत किया है। अभिभावकों का कहना है कि ५ लाख रुपये के जुर्माने के इस कड़े विधिक प्रहार से अन्य मनमानी करने वाले स्कूलों के हौसले भी पस्त होंगे। जिला कलेक्ट्रेट जनसुनवाई सेल और शिक्षा अनुभाग ने पुनः राजधानी के समस्त जागरूक अभिभावकों से विधिक अपील की है कि यदि कोई भी निजी स्कूल निर्धारित मानकों से अधिक विकास शुल्क, री-एडमिशन फीस या जबरन कॉपियों-किताबों की मद में अवैध धन की मांग करता है, तो उसके विधिक साक्ष्य सीधे जिला शुल्क नियामक समिति के पटल पर दर्ज कराएं, ताकि आपसी समन्वय से विधिक सुशासन का राज हमेशा कायम रहे।
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