ब्यूरो रिपोर्ट: जहीन खान ✍️
लखनऊ। भारत की एकता और अखंडता के प्रतीक, संविधान सभा के सदस्य, शिक्षाविद एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर भारतीय जनता पार्टी, जिला लखनऊ द्वारा बख्शी तालाब स्थित श्रीपति लॉन में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस संगोष्ठी की अध्यक्षता भाजपा जिला अध्यक्ष विजय मौर्य ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में प्रदेश उपाध्यक्ष देवेश कुमार उपस्थित रहे। संगोष्ठी में उपस्थित वक्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रहित में दिए गए योगदान को याद करते हुए उनके विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता देवेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन त्याग, संघर्ष और बलिदान की मिसाल है। उन्होंने देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान के प्रबल विरोध में आवाज उठाई और अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर की परमिट व्यवस्था को चुनौती दी।
उन्होंने बताया कि डॉ. मुखर्जी ऐसे पहले केंद्रीय मंत्री थे जिन्होंने राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कभी अपनी राष्ट्रवादी विचारधारा से समझौता नहीं किया, चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़ी हो।
गोष्ठी में अन्य वक्ताओं ने भी डॉ. मुखर्जी के विचारों और कार्यों को देश के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को नमन करते हुए ‘एक देश, एक विधान, एक प्रधान’ के संकल्प को दोहराया।
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