लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने उत्तर प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित और दुर्घटनामुक्त बनाने के लिए विधिक व व्यावहारिक रूप से एक बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राजधानी लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय विधिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री जी ने गृह, परिवहन, पीडब्ल्यूडी और पुलिस कमिश्नरेट सहित सभी संबंधित विभागों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री जी ने दोटूक शब्दों में कहा कि हमारे लिए प्रत्येक नागरिक का अमूल्य जीवन अत्यंत महत्वपूर्ण है, और सड़क दुर्घटनाओं में हो रही असामयिक मृत्यु न केवल परिवारों की बल्कि पूरे देश व राज्य की अपूरणीय विधिक व सामाजिक क्षति है।
🚫 स्टंटबाजी, ओवरस्पीडिंग और नशे में ड्राइविंग पर पूर्ण विधिक प्रतिबंध:
मुख्यमंत्री जी ने सख्त विधिक निर्देश दिए कि प्रदेश की सड़कों पर स्टंटबाजी, ओवर स्पीड (तेज गति) तथा नशे की हालत में वाहन संचालन किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसा विनाशात्मक कृत्य करने वालों के खिलाफ तत्काल कठोर विधिक दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि किसी वाहन का बार-बार (आदतन) चालान हो रहा है, तो केवल जुर्माना लगाने के बजाय उस पर विधिक रूप से कठोरतम जब्तीकरण व लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाए।
| 👮 प्रशासनिक जवाबदेही व बुनियादी सुधार | 📢 जनजागरूकता एवं इंफ्रास्ट्रक्चर इंफोर्समेंट |
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• पाक्षिक समीक्षा बैठक: शासन स्तर पर प्रत्येक १५ दिनों (पाक्षिक) में सड़क सुरक्षा कार्यों की प्रगति का विधिक मूल्यांकन होगा और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। • परिवहन निगम को कड़े निर्देश: सड़कों पर केवल वही सरकारी व अनुबंधित बसें चलेंगी जिनकी फिटनेस शत-प्रतिशत सही होगी। चालकों व परिचालकों का नियमित अंतराल पर विधिक स्वास्थ्य व नेत्र परीक्षण अनिवार्य होगा। |
• पब्लिक एड्रेस सिस्टम: सभी व्यस्त चौराहों, टोल प्लाजा, व्यस्त मार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर लाउडस्पीकर/पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से आमजन को यातायात नियमों की विधिक जानकारी लगातार दी जाएगी। • ब्लैक स्पॉट का तय समय में सुधार: प्रदेश के सभी दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों (Black Spots) को विधिक रूप से चिन्हित कर समयबद्ध सीमा के भीतर उनका तकनीकी निराकरण किया जाए। |
यातायात को नियंत्रित करने और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री जी ने लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सड़कों के उपयुक्त व दृश्य स्थलों पर स्पष्ट साइनेज (यातायात संकेत बोर्ड) लगाए जाएं। गति सीमा पर प्रभावी विधिक अंकुश लगाने के लिए चौराहों समेत सभी आवश्यक और दुर्घटना संभावित स्थानों पर वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप टेबलटॉप स्पीड ब्रेकर (Tabletop Speed Breakers) का निर्माण कराया जाए, ताकि वाहनों की गति को सुरक्षित स्तर पर लाया जा सके।
"सड़क पर चलते समय नियमों का उल्लंघन करना केवल एक विधिक अपराध नहीं, बल्कि अपने और दूसरों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। अधिकांश सड़क हादसे जागरूकता के अभाव और मानवीय भूलों के कारण घटित होते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में सड़क सुरक्षा से संबंधित सघन विशेष विधिक अभियान चलाए जाएं। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना और यातायात सिग्नलों का आदर करना हर नागरिक के दैनिक आचरण का हिस्सा बनना चाहिए। इसके लिए बड़े पैमाने पर शैक्षणिक व सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।"
इस हाई-लेवल विधिक बैठक के बाद परिवहन और गृह विभाग ने सीएम के विज़न को धरातल पर उतारने के लिए विधिक रूप से कड़े दिशा-निर्देश तैयार कर लिए हैं। अब सभी जनपदों के जिलाधिकारियों और कप्तानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्कूलों, कॉलेजों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ मिलकर वृहद सुरक्षा जागरूकता रैलियों का आयोजन करें। नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले रश-ड्राइविंग करने वाले तत्वों के खिलाफ विधिक मुस्तैदी बरतते हुए चेकिंग पॉइंट्स बढ़ाए जाएंगे, ताकि उत्तर प्रदेश की सड़कों को पूरी तरह सुरक्षित और सुगम बनाया जा सके।
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