लखनऊ। प्रांतीय राजधानी के सरोजनीनगर तहसील क्षेत्र अंतर्गत ढांचागत विकास और महा-परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही कृषि भूमियों के उचित मूल्यांकन को लेकर अन्नदाताओं ने विधिक मोर्चा खोल दिया है। आगरा एक्सप्रेस-वे से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को जोड़ने वाले नए लिंक एक्सप्रेस-वे तथा लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की महत्वाकांक्षी वरुण विहार योजना से प्रभावित स्थानीय काश्तकारों व किसानों की मांगों को लेकर तहसील क्षेत्र में एक विशाल एकदिवसीय किसान पंचायत का आयोजन किया गया। इस महा-मंच से किसानों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर शासन-प्रशासन से अपनी पुश्तैनी जमीनों के बदले वर्तमान बाजार दर (Market Rate) से कम से कम दोगुना मुआवजा दिए जाने की कड़ाई से मांग उठाई है।
📌 विकास योजनाओं से प्रभावित कई गांवों के किसान जुटे, विसंगतिपूर्ण मूल्यांकन पर गहरा रोष:
किसान पंचायत प्रविष्टि के प्रामाणिक विलेखों के अनुसार, सरोजनीनगर प्रभाग में इस समय दो बड़े भूमि अधिग्रहण की नोडल विधिक प्रक्रियाएं चल रही हैं। प्रथम, आगरा-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर और द्वितीय, एलडीए की वरुण विहार आवासीय योजना। पंचायत में जुटे किसान नेताओं ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा उनकी उपजाऊ भूमियों का जो सर्किल रेट या मूल्यांकन तय किया जा रहा है, वह वर्तमान जमीनी हकीकत से काफी कम है। यदि उनकी जमीनों का पारदर्शी तरीके से दोगुना विलेख मुआवजा तय नहीं किया गया, तो वे अपनी जमीनों पर एलडीए या निर्माणदायी संस्था को कस्टडी पजेशन नहीं लेने देंगे।
| 📊 प्रभावित करने वाली मुख्य महा-परियोजनाएं | 🏛️ कलेक्ट्रेट व तहसील प्रशासन के समक्ष मुख्य मांगे |
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• परियोजना १: आगरा एक्सप्रेस-वे से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को जोड़ने वाला लिंक एक्सप्रेस-वे ग्रिड। • परियोजना २: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की वरुण विहार टाउनशिप योजना। • प्रभावित क्षेत्र: तहसील सरोजनीनगर के अंतर्गत आने वाले आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण अंचल। |
• मुआवजा नीति: वर्तमान मार्केट रेट का स्पष्ट मिलान कर कम से कम दोगुना (2X) मूल्य भुगतान। • पारदर्शिता सर्विलांस: भूमि पैमाइश व विलेखों के चिन्हांकन में किसानों की सहमति व सहभागिता अनिवार्य हो। • पुनर्वास मांग: भूमिहीन होने वाले छोटे किसानों को योजना के भीतर वैकल्पिक रोजगार/भूखंड की व्यवस्था। |
सरोजनीनगर क्षेत्र में हुई इस एकदिवसीय किसान महा-पंचायत के दौरान कानून व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ व नियंत्रण में रही। स्थानीय उपजिलाधिकारी (SDM) कमान और स्थानीय पुलिस बल सुरक्षा सर्विलांस हेतु तैनात रहा। किसान नेताओं ने पूर्ण अनुशासन व मर्यादित ढंग से मंच का संचालन किया और अपनी जायज विधिक मांगों को लेकर एक नोडल ज्ञापन महामहिम राज्यपाल व मुख्यमंत्री जी को संबोधित करते हुए स्थानीय प्रशासनिक नोडल अधिकारी को सौंपा। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे विकास विरोधी नहीं हैं, लेकिन सुशासन राज में उनके अधिकारों का विसंगतिपूर्ण दमन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
"सरोजनीनगर के किसानों ने हमेशा कलेक्ट्रेट और सूबे की नीतियों का सम्मान किया है। चाहे आगरा एक्सप्रेस-वे हो या वरुण विहार, हमने विकास के लिए अपनी मातृभूमि देने का मन बनाया है। लेकिन एलडीए और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की विसंगतिपूर्ण नीतियों के कारण किसानों को उनके वाजिब हक से वंचित रखने का प्रयास किया जा रहा है। हमारी विलेख मांग अत्यंत तार्किक है—जब हमारी जमीन पर करोड़ों के फ्लैट और मेगा हाईवे बनेंगे, तो हमें पुरानी सर्किल रेट पर मुआवजा क्यों मिले? हमें मार्केट रेट से दोगुना दाम दिया जाए और अधिग्रहित होने वाले पेड़ों व नलकूपों का भी शत-प्रतिशत निष्पक्ष मूल्यांकन कस्टडी जांच के साथ किया जाए। जब तक विधिक सहमति पत्र नहीं बनेगा, हमारा शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।" — किसान पंचायत कोर कमेटी प्रवक्ता सूत्र
सरोजनीनगर कस्बा, मोहान रोड अंचल, बिजनौर मार्ग बेल्ट, अमौसी आउटर सर्किल, कलेक्ट्रेट कचहरी प्रभाग और तहसील जनसुनवाई मंचों से जुड़े विभिन्न स्थानीय सम्मानित प्रबुद्ध नागरिकों, कृषक यूनियनों, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किसानों द्वारा अत्यंत मर्यादित व सुशासनात्मक तरीके से अपनी बात रखने के इस कदम की सराहना की है। राजस्व विभाग प्रभाग ने पुनः समस्त काश्तकारों से विधिक अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक विसंगतिपूर्ण अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि भूमि पैमाइश, विलेख प्रविष्टि या खतौनी नामकरण में कोई विसंगति नजर आती है, तो स्वयं कानून हाथ में न लें; बल्कि तत्काल इसकी प्रामाणिक सूचना तहसील कलेक्ट्रेट जनसुनवाई पटल पर या नोडल राजस्व अधिकारी को दर्ज कराएं, ताकि आपसी समन्वय और पारदर्शी संवाद से विधिक व त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
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