ब्यूरो रिपोर्ट: दर्शन गुप्ता
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में बुधवार को 30 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। इस बैठक में औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचा, रोजगार, परिवहन और राजस्व सुधार जैसे अहम मुद्दों पर निर्णय लिया गया।
सबसे बड़ा फैसला जेपीएनआईसी (जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर) को लेकर किया गया, जो लंबे समय से राजनीतिक विवादों में रहा है। योगी सरकार ने जेपीएनआईसी सोसायटी को भंग कर उसकी जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंपने का निर्णय लिया है। इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार सरकार पर निशाना साधते रहे हैं।
औद्योगिक विकास को नई दिशा
कैबिनेट बैठक में बुंदेलखंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (BIDA) के अंतर्गत न्यू इंडस्ट्रियल टाउनशिप योजना को स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रस्तावों को भी मंजूरी मिल गई है। औद्योगिक इकाइयों को नई नीति के तहत सब्सिडी और लेटर ऑफ कंफर्ट देने का निर्णय लिया गया है।
लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी
सरकार ने लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी दी है, जो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। 49.96 किमी लंबा यह ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे EPC मॉडल पर 4776 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होगा। इससे लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और गाजीपुर जैसे शहरों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण ग्रिड नेटवर्क सशक्त होगा।
रोजगार मिशन की घोषणा
कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के गठन को हरी झंडी मिल गई है। इसके तहत एक वर्ष में 1 लाख युवाओं को देश में और 30 हजार को विदेशों में रोजगार दिलाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस कार्य के लिए राज्य और जिला स्तर पर पांच समितियों का गठन किया जाएगा।
वित्तीय और राजस्व सुधार
बैठक में वित्त विभाग के इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम को मंजूरी दी गई है जिससे राजस्व में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। इसके अलावा यूपी मोटरयान कराधान अधिनियम 1997 में संशोधन कर वन टाइम टैक्स व्यवस्था लागू की जाएगी।
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