शाहजहाँपुर | 06 नवम्बर 2025
उत्तर प्रदेश अपनी भौगोलिक विविधता और समृद्ध कृषि उपज के कारण खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में एक उभरता हुआ हब बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति–2023 के तहत दी गई सुविधाओं से प्रदेश में लगातार नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित हो रही हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।
राज्य सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भूमि, निवेश, बिजली, परिवहन और करों से संबंधित कई रियायतें प्रदान की हैं। नीति के तहत—
सरकार द्वारा संयंत्र, मशीनरी और तकनीकी सिविल कार्यों पर किए गए व्यय पर 35% पूंजीगत सब्सिडी (अधिकतम ₹5 करोड़) तक दी जा रही है। वहीं मौजूदा इकाइयों के आधुनिकीकरण या विस्तार हेतु ₹1 करोड़ तक की सब्सिडी का लाभ मिल रहा है।
प्रदेश में मूल्यवर्धन और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रीफर वाहन, मोबाइल प्री-कूलिंग वैन की खरीद के लिए ब्याज सब्सिडी दी जा रही है, ताकि फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
राज्य में अब तक 65 हजार से अधिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित हो चुकी हैं, जिनसे लाखों लोगों को रोजगार मिला है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में लक्षित 78,981 इकाइयों में से 19,104 इकाइयों का उन्नयन या नई स्थापना सितंबर 2025 तक पूरी हो चुकी है।
वर्तमान में प्रदेश में 15 से अधिक एग्रो व फूड प्रोसेसिंग पार्क विकसित हो चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले में कम से कम 1000 खाद्य प्रसंस्करण यूनिट्स स्थापित हों, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलें।
👉 उत्तर प्रदेश सरकार की यह नीति राज्य को खाद्य प्रसंस्करण के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है।
लखनऊ
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