ब्यूरो रिपोर्ट : तशरीफ़ अली
माछरा, मेरठ।
ब्लॉक संसाधन केंद्र माछरा के सभागार कक्ष में समेकित शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत दिव्यांग बच्चों के लिए आयोजित पांच दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का शनिवार 24 जनवरी 2026 को विधिवत समापन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यशाला 19 जनवरी से 24 जनवरी तक संचालित की गई।
कार्यशाला का समापन खंड शिक्षा अधिकारी माछरा, श्री अजय कुमार द्वारा किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रीमती आशा चौधरी के निर्देशन में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षकों को समावेशी एवं व्यवहारिक शिक्षण कौशल से सशक्त बनाना था।
पांच दिवसीय प्रशिक्षण में प्रशिक्षक एवं स्पेशल एजुकेटर शिवकेश तिवारी, प्रमोद कुमार एवं तशरीफ़ अली द्वारा सहायक अध्यापकों को समावेशी कक्षा में व्यवहार संबंधी समस्याओं का समाधान, सकारात्मक व्यवहार प्रबंधन, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, उनकी विशेषताएं एवं शैक्षिक बाधाओं पर विस्तृत जानकारी दी गई।
इसके साथ ही दिव्यांग बच्चों का कक्षा शिक्षण एवं मूल्यांकन, निदानात्मक शिक्षण, समावेशी कक्षा में भाषा, गणित एवं विज्ञान के शिक्षण की विधियां, बहु-संवेदी टी.एल.एम. (Teaching Learning Material) का निर्माण, अनुकूलित शारीरिक शिक्षा, खेल एवं योग तथा शिक्षा विभाग द्वारा दिव्यांग बच्चों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों के अनुभव और विचार लिए गए, जिन पर गहन चर्चा कर व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत किए गए।
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में 35 परिषदीय सहायक अध्यापकों ने सहभागिता की, जिनमें प्रमुख रूप से मांगेराम, गजाला खान, शबाना परवीन, मीनाक्षी रानी, भूप सिंह, अरुण कुमार, प्रीति, सुषमा, अंजना, सुदीप कुमार, रामकिशन सिंह, भावना, संगीता, शमीम गौड़, भावना गुप्ता, चंचल रानी, अंजू, दिव्या आर्य, चंद्र बोस, जावेद सैफी, गुलबहार, एकता, नीतू, मुल्कीराज, आदेश, स्मिता गोयल, प्रीति शर्मा, मीनू, चित्रा सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे।
कार्यशाला के सफल संचालन में बी.आर.सी. स्टाफ अमरीश कुमार शर्मा, चारू शर्मा, इमरान अहमद, चांद मोहम्मद, अनिल कुमार, सोनू कुमार, मयंक शर्मा सहित समस्त स्टाफ का विशेष सहयोग रहा।
समापन अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के प्रति संवेदनशील बनाते हैं और दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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