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कृषकों के बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा कवच है प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना


 स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻 

शाहजहाँपुर | 02 फरवरी, 2026

किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। उनके सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार कई जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही है। किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना संचालित की जा रही है।

देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शुरू की गई यह योजना किसानों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की गारंटी है। योजना के अंतर्गत 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद किसानों को ₹3000 प्रतिमाह, यानी ₹36,000 वार्षिक पेंशन प्रदान की जाती है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा इस योजना को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिससे लाखों किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

सरकार पहले से ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को ₹6000 वार्षिक सहायता प्रदान कर रही है। उसी क्रम में किसान मानधन योजना किसानों के बुढ़ापे को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, ताकि वृद्धावस्था में उन्हें किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े और वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।

इस योजना का लाभ वे किसान ले सकते हैं जिनकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच है। पंजीकरण के बाद किसान को हर माह एक निश्चित प्रीमियम जमा करना होता है।

  • 18 वर्ष आयु के किसान को ₹55 प्रतिमाह
  • 40 वर्ष आयु के किसान को ₹200 प्रतिमाह

इस योजना में 50 प्रतिशत अंशदान किसान और 50 प्रतिशत अंशदान सरकार द्वारा किया जाता है।

जो किसान पहले से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी हैं, उन्हें पंजीकरण के लिए अलग से किसी कागजी कार्यवाही की आवश्यकता नहीं होती। किसान अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र (CSC) पर जाकर आसानी से पंजीकरण करा सकते हैं।

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना एक स्वैच्छिक एवं अंशदायी पेंशन योजना है, जिसमें पुरुष और महिला दोनों किसान शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य लघु, सीमान्त एवं सभी वर्ग के किसानों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।

प्रदेश में इस योजना के अंतर्गत दिसंबर 2025 तक 2.52 लाख से अधिक किसानों को पेंशन कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं। प्रदेश सरकार अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है।



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