स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहाँपुर, 27 फरवरी 2026। प्रदेश सरकार द्वारा संस्कृत शिक्षा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिकीकरण की दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। संस्कृत, जिसे विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में स्थान प्राप्त है, भारतीय सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा की मूल आधारशिला रही है। वैदिक काल से चली आ रही इसकी मौखिक परंपरा आज भी अक्षुण्ण है और उच्चारण पद्धति भी मूल रूप में सुरक्षित है।
प्रदेश में वर्तमान में 1296 संस्कृत माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें एक लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। सरकार द्वारा संस्कृत शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। पूर्व में जहां केवल 2 राजकीय संस्कृत माध्यमिक विद्यालय थे, वहीं अब 15 नवीन आवासीय संस्कृत माध्यमिक विद्यालय स्थापित किए गए हैं।
वर्ष 2023 में सहायता प्राप्त 900 संस्कृत विद्यालयों के आधारभूत ढांचे के विकास एवं सुदृढ़ीकरण हेतु ₹100 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई। इसके अतिरिक्त साज-सज्जा एवं फर्नीचर के लिए ₹5 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी प्रदान की गई है।
शिक्षकों की कमी दूर करने हेतु 1020 मानदेय शिक्षकों की नियुक्ति की गई है तथा पहली बार पारदर्शी चयन प्रक्रिया लागू की गई। प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों के लिए 5 दिवसीय दक्षता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं।
संस्कृत शिक्षा के आधुनिकीकरण के तहत पारंपरिक विषयों के साथ एनसीईआरटी आधारित आधुनिक पाठ्यक्रम को वर्ष 2019 से लागू किया गया है। साथ ही रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पौरोहित्य (कर्मकांड), व्यवहारिक वास्तुशास्त्र, व्यवहारिक ज्योतिष और योग विज्ञान जैसे डिप्लोमा पाठ्यक्रम 34 संस्थानों में संचालित किए जा रहे हैं।
कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें एवं मध्याह्न भोजन तथा कक्षा 12 तक के पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। परीक्षा प्रणाली में भी सुधार करते हुए ऑनलाइन आवेदन, अग्रिम पंजीकरण एवं सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था लागू की गई है।
प्रदेश सरकार के इन प्रयासों से स्पष्ट है कि संस्कृत शिक्षा को नई दिशा देते हुए इसे रोजगारोन्मुख एवं आधुनिक स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।
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