स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहाँपुर, 27 फरवरी 2026। प्रदेश सरकार द्वारा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करने हेतु व्यापक स्तर पर औद्योगिक विकास केंद्रों एवं निर्यात हब का विकास किया जा रहा है। औद्योगिक विकास के माध्यम से विनिर्माण, खनन एवं उत्पादन गतिविधियों का विस्तार और आधुनिकीकरण कर आर्थिक वृद्धि, तकनीकी नवाचार, रोजगार सृजन तथा जीवन स्तर में सुधार सुनिश्चित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में उद्योग स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए निवेश अनुकूल नीतियां लागू की गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में तेजी से निवेश बढ़ा है।
प्रदेश में अनेक औद्योगिक विकास केंद्र एवं निर्यात हब विकसित किए जा रहे हैं। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में सेमीकंडक्टर पार्क, डाटा सेंटर पार्क तथा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मित्र योजना के अंतर्गत लखनऊ-हरदोई क्षेत्र में मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क तथा हरदोई-कानपुर क्षेत्र में मेगा लेदर क्लस्टर विकसित किया जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा निवेश क्षेत्र में विमान हब, एमआरओ-कार्गो कॉम्प्लेक्स, दादरी में मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब, बोराकी में परिवहन हब, मेडिकल डिवाइस पार्क एवं फिल्म सिटी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इसके अतिरिक्त बरेली में मेगा फूड पार्क, उन्नाव में ट्रांस-गंगा सिटी, गोरखपुर में प्लास्टिक पार्क एवं गारमेंट पार्क सहित कई फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं।
क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक पार्कों में गोरखपुर का प्लास्टिक पार्क, कन्नौज का परफ्यूम पार्क तथा गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर नगर, गोरखपुर एवं हापुड़ में केमिकल एवं फार्मा पार्क प्रमुख हैं।
उत्तर प्रदेश नोडल विनिर्माण क्षेत्र अधिनियम, 2024 के माध्यम से 20,000 एकड़ भूमि बैंक पर चार विशेष निवेश क्षेत्र स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। साथ ही यूपीआईएमएलसी परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के पांच प्रमुख एक्सप्रेस-वे पर 27 एकीकृत विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करने की योजना है।
बुंदेलखंड क्षेत्र के समग्र विकास हेतु वर्ष 2024 में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) की स्थापना की गई है। झांसी जनपद के 33 राजस्व ग्रामों में प्रारंभिक चरण में 35,000 एकड़ भूमि प्रस्तावित थी, जिसे बढ़ाकर 56,000 एकड़ से अधिक किया गया है। इस पहल से ऐतिहासिक रूप से अविकसित बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
प्रदेश सरकार की इन पहलों से उत्तर प्रदेश को एक प्रमुख औद्योगिक एवं निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है।
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