लखनऊ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर भारतीय इतिहास की महान शासक, समाजसेवी और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की प्रतीक रही हैं। उनके सम्मान और योगदान को स्मरणीय बनाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि काशी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जो देश की सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक परंपरा को सुदृढ़ करने का प्रतीक है। साथ ही उनकी 300वीं जयंती के अवसर पर औरैया स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज का नामकरण भी उनके नाम पर किया गया है, जिससे नई पीढ़ी को उनके आदर्शों और सेवा भावना से प्रेरणा मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने अपने शासनकाल में अनेक मंदिरों, घाटों और धर्मस्थलों का निर्माण एवं पुनरुद्धार कराया था। इसी क्रम में यदि उनके नाम से जुड़े मणिकर्णिका घाट तथा वहां के श्मशान घाट के विकास और पुनरुद्धार के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाता है, तो विपक्ष द्वारा उसका भी विरोध किया जाता है। उन्होंने कहा कि महान विभूतियों के सम्मान और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण जैसे विषयों को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल स्मारक निर्माण नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है। ऐसे प्रयासों से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था सशक्त होगी और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ प्राप्त होंगी।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे महान ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएँ और समाज में सेवा, सद्भाव तथा सांस्कृतिक गौरव की भावना को मजबूत करें। उनके अनुसार, लोकमाता अहिल्याबाई होलकर का जीवन त्याग, न्यायप्रियता और लोककल्याण की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री के इस बयान को प्रदेश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण से जुड़े व्यापक प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।
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