शाहजहाँपुर। जनपद के शैक्षिक, आध्यात्मिक और विलेखीय इतिहास में आज का दिन एक स्वर्णिम और युगांतरकारी अध्याय के रूप में अंकित हो गया है। मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता एवं अध्यक्ष **स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती** ने एक अभूतपूर्व व ऐतिहासिक कदम उठाते हुए आश्रम की लगभग **222 करोड़ रुपये** मूल्य की विशाल भूसंपत्तियाँ नवस्थापित स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के नाम विधिवत दान कर दी हैं। यह महादान महज एक भौतिक संपत्ति का हस्तांतरण नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के बौद्धिक विकास, सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के महान संकल्प का कलेक्टिव समर्पण है।
इस ऐतिहासिक विलेख को अमलीजामा पहनाने के लिए आज अपराह्न स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती स्वयं मुख्य सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पहुँचे। रजिस्ट्री भवन में उनके साथ क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी बरेली प्रो. सुधीर चौहान, विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य, एसएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा तथा एसएसएमवी के सचिव अशोक अग्रवाल कमान गवाह के रूप में मौजूद रहे। सब रजिस्ट्रार धर्मेंद्र कुमार सिंह के समक्ष पूरी कानूनी पारदर्शिता के साथ दान पत्र अभिलेख (Gift Deed) को पढ़ा गया, जिसके उपरांत दोनों पक्षों ने कलेक्टिव रूप से उस पर अपने हस्ताक्षर किए।
विलेखीय नियमों के तहत मुमुक्षु आश्रम की ओर से स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती तथा उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल (जो कि राज्य के विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति होती हैं) की ओर से क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो. सुधीर चौहान ने मुख्य दान पत्र पर हस्ताक्षर किए। विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य तथा एसएस कॉलेज एवं एसएस लॉ कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा ने इस विलेखीय दस्तावेज पर मुख्य गवाहों के रूप में अपनी कमान उपस्थिति दर्ज कराई।
| ⚖️ विलेखीय हस्ताक्षरकर्ता एवं गवाह | 🏛️ मुख्य उपस्थित प्रबुद्ध वर्ग एवं साक्षी |
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• दाता पक्ष: स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती (अध्यक्ष, मुमुक्षु आश्रम) • स्वीकर्ता पक्ष: प्रो. सुधीर चौहान (राज्यपाल/शासन प्रतिनिधि) • आधिकारिक गवाह: कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य एवं डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा |
• प्रशासनिक अधिकारी: धर्मेंद्र कुमार सिंह (सब रजिस्ट्रार शाहजहाँपुर) • सहयोगी गरिमामयी उपस्थिति: सचिव अशोक अग्रवाल, अशोक सिंह, सुयश सिन्हा, रविशंकर बाजपेयी और रामनिवास गुप्ता कलेक्टिव रूप से साक्षी रहे। |
रजिस्ट्री की कानूनी प्रक्रिया संपन्न होने के उपरांत मीडियाकर्मियों से कमान वार्ता करते हुए स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती अत्यंत भावुक नजर आए। उन्होंने अतीत को याद करते हुए कहा कि लगभग छह दशक पहले पूज्य स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज ने शाहजहाँपुर की धरती पर जिस उच्च 'शिक्षण-साधना' का स्वप्न देखा था, वह आज प्रदेश के यशस्वी और संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दृढ़ भगीरथ प्रयासों से धरातल पर पूर्णतया मूर्त रूप ले रहा है। उन्होंने साझा किया कि जब वे वर्ष 1989 में पहली बार शाहजहाँपुर आए थे, तब यहाँ उच्च शिक्षण संस्थानों व विद्यालयों की स्थिति अत्यंत दयनीय और चिंताजनक थी, लेकिन कड़े विलेखीय संकल्प, सेवा और सनातन संस्कारों के बल पर इस धरा पर शिक्षा का महा-नवजागरण प्रारंभ हुआ।
इसी साधना के क्रम में जनपद को सबसे पहला सीबीएसई अंग्रेजी माध्यम स्कूल ‘श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ’ मिला, एसएस कॉलेज में रिकॉर्ड 14 विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन (परास्नातक) की कक्षाएं शुरू की गईं और कानून की उच्च शिक्षा के लिए 'एसएस लॉ कॉलेज' की नींव रखी गई। स्वामी चिन्मयानंद ने अंत में कहा कि आज इस विशाल भू-संपत्ति को नवस्थापित विश्वविद्यालय के नाम सौंपते हुए उन्हें असीम आत्मिक संतोष और परमानंद की अनुभूति हो रही है। यह संस्थान आने वाले समय में वैश्विक शोध, आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सनातन संस्कार और मानवता के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा।
"यह 222 करोड़ की भूसंपत्ति शाहजहाँपुर की जनता और युवाओं के स्वर्णिम भविष्य के लिए एक आहुति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय पूरे राष्ट्र में उच्च शिक्षा और शोध का एक ऐसा प्रखर आलोक स्तंभ बने, जहां से निकलने वाला प्रत्येक छात्र राष्ट्र चेतना और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत हो।" — स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती
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