Breaking News

लखनऊ महा-बैठक: यूपी में बनेगी 'ओपन जेल', बहुमंजिला कारागारों को...

 

⚖️ कारागार प्रभाग महा-समीक्षा / सुशासनात्मक सुधार विज़न
✍️ स्टेट ब्यूरो हेड: योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश
📅 लखनऊ | 26 मई, 2026
🌐 सच की आवाज वेब न्यूज — जेल सुधार नीति: पेशेवर अपराधियों व माफियाओं पर कड़ा विधिक शिकंजा, बुजुर्ग, बीमार व गरीब बंदियों के लिए मानवीय दृष्टिकोण और आत्मनिर्भरता का अभियान

खनऊ। उत्तर प्रदेश के कारागारों को दंडात्मक विसंगतियों से मुक्त कर एक आदर्श सुधारात्मक केंद्र के रूप में तब्दील करने, बंदियों के मानवाधिकारों की रक्षा के साथ-साथ अभेद्य सुरक्षा चक्र स्थापित करने हेतु शासन स्तर पर ऐतिहासिक विलेख तैयार किया गया है। आज मुख्यमंत्री **योगी आदित्यनाथ जी** ने लखनऊ मुख्यालय में कारागार विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न की। बैठक में मुख्यमंत्री जी ने कड़े नीतिगत निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि जेलें केवल बंदियों को निरूद्ध रखने का स्थान नहीं हैं, बल्कि इन्हें अपराधियों के वास्तविक सुधार, पुनर्वास और तकनीकी कौशल विकास के प्रभावी केंद्रों के रूप में नई पहचान दी जाएगी।

📌 छोटे अपराधों में सुधारात्मक मॉडल; 'ओपन जेल' की परिकल्पना के विलेखीय निर्देश:

मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश में **'ओपन जेल' (Open Jail)** की अवधारणा को बेहद उपयोगी बताते हुए इसके विलेख क्रियान्वयन हेतु एक विशेष नोडल कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने रेखांकित किया कि कड़े कस्टडी घेरे में केवल कुख्यात माफियाओं और पेशेवर अपराधियों को ही रखने की आवश्यकता है। सामान्य व छोटे अपराधों के मामलों में बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सुधारात्मक एवं कौशल विकास मॉडल अपनाया जाना चाहिए, ताकि कारागारों से मुक्त होने के बाद वे आत्मनिर्भर नागरिक बन सकें।

📜 कारागार अवसंरचना सुदृढ़ीकरण एवं कैदी वर्गीकरण चार्ट:
📊 इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन व तकनीकी सर्विलांस ⚖️ संवेदनशील कैदी राहत एवं विधिक कस्टडी रोस्टर
ओवरक्राउडिंग का शमन: जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों के दबाव को कम करने के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं का समयबद्ध निष्पादन।
बहुमंजिला (Multi-storey) कारागार: भविष्य के निर्माणों में बहुमंजिला जेलों के मॉडल को सर्वोच्च प्राथमिकता।
डिजिटल सुरक्षा ग्रिड: तकनीक आधारित एडवांस निगरानी प्रणाली, बायोमेट्रिक ट्रैकिंग व कड़े एआई कैमरों से सुदृढ़ीकरण।
विशेष श्रेणी सूची विलेख: ७५ वर्ष से अधिक आयु के कैदियों तथा असाध्य रोगों से ग्रस्त बंदियों की विस्तृत सूची तैयार करने के निर्देश।
महिला व बाल कल्याण: कारागारों में माताओं के साथ रह रहे निर्दोष बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण हेतु कड़े नोडल निर्देश।
आर्थिक रूप से कमजोर बंदी: जमानत राशि (Bail Amount) जमा न कर पाने के कारण निरुद्ध निर्धन कैदियों की विधिक सहायता हेतु विशेष पहल।
🛡️ जेल सुरक्षा व्यवस्था से कोई समझौता नहीं; बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बढ़ेंगी उत्पादन गतिविधियां:

मुख्यमंत्री जी ने समीक्षा सत्र के दौरान जेल आलाकमान को कड़े लहजे में सचेत किया कि जेलों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था व अनुशासन से किसी भी स्तर पर समझौता कतई स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने तकनीकी निगरानी को और अभेद्य बनाने के निर्देश देने के साथ ही, बंदियों के श्रम को रचनात्मक दिशा देने की पैरवी की। जेलों के भीतर एमएसएमई (MSME) व ओडीओपी (ODOP) ग्रिड की तर्ज पर व्यावसायिक उत्पादन गतिविधियों और वोकेशनल ट्रेनिंग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे बंदियों को समाज की मुख्यधारा में पुनर्वासित किया जा सके।

जेलों का सुधारात्मक वातावरण ही कैदियों के भीतर की आपराधिक वृत्तियों का समूल नाश करेगा

"कारागार विभाग को अपनी पुरानी दकियानूसी प्रशासनिक विसंगतियों को छोड़कर पूर्णतः पारदर्शी और सुधारोन्मुखी मॉडल अपनाना होगा। जो बंदी अज्ञानता या परिस्थितियों वश छोटे अपराधों में जेल पहुंचे हैं, उन्हें कौशल विकास देकर समाज का उपयोगी अंग बनाना हमारी सरकार की सुशासनात्मक प्राथमिकता है। ७५ वर्ष से ऊपर के अति-बुजुर्गों, गंभीर रूप से बीमार बंदियों और केवल गरीबी के कारण जमानत न पा सकने वाले कैदियों के मामलों का विलेखीय परीक्षण कर उन्हें विधिक राहत पहुंचाई जाए। जेल परिसरों की स्वच्छता, कैदियों के स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को कलेक्ट्रेट व मानवाधिकार रोस्टर के अनुरूप विश्वस्तरीय बनाया जाए, परंतु सुरक्षा के मोर्चे पर अभेद्य चौकसी बनी रहे।" — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ सचिवालय कमान, प्रांतीय कारागार महानिदेशालय, जिला कारागार शाहजहाँपुर, आदर्श कारागार लखनऊ प्रभाग, विधिक सेवा प्राधिकरण, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के सम्मानित अधिवक्ताओं, मानवाधिकार अधिकार मंचों और जनसुनवाई पटल से जुड़े विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मुख्यमंत्री जी द्वारा स्वयं आगे बढ़कर जेलों को बहुमंजिला व आधुनिक सर्विलांस ग्रिड से जोड़ने तथा गरीब बंदियों की जमानत प्रक्रियाओं को सरल बनाने के इस सुशासनात्मक विलेखीय कदम की खुले दिल से सराहना की है। कारागार महानिदेशालय नोडल प्रभाग ने पुनः समस्त संबंधित जेल कप्तानों को निर्देशित किया है कि वे कलेक्ट्रेट गाइडलाइंस के अनुरूप बंदियों की श्रेणियों का डेटाबेस तत्काल अद्यतन करें। यदि किसी भी जेल परिसर में सुरक्षा नियमों की अनदेखी या बंदियों के बुनियादी अधिकारों के हनन की अमर्यादित विसंगति परिलक्षित होती है, तो नागरिक इसकी प्रामाणिक गुप्त सूचना सीधे मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर प्रेषित कर सकते हैं। आपका सहयोग ही सुशासित उत्तर प्रदेश की अभेद्य नींव है।

🏷️ #CM_YogiAdityanath #UP_PrisonDepartment #OpenJailConcept #PrisonReforms2026 #SkillDevelopmentInJails #MultiStoreyPrisons #BailAssistanceUP #PrisonSecurityAI #RehabilitationOfPrisoners #TransparentGovernance #SachKiAawaz
📈 उत्कृष्ट प्रशासनिक सुशासन, सुदृढ़ सुधारात्मक कीर्तिमान — सुरक्षा विसंगतियों का समूल विधिक नाश, कारागार प्रभागों का सतत डिजिटल सर्विलांस और प्रत्येक बंदी के गरिमापूर्ण विधिक अधिकारों के संरक्षण हेतु सदैव समर्पित 'सच की आवाज'।

"जनता के हक की आवाज, हर समय - सच की आवाज वेब न्यूज"

Post a Comment

0 Comments