लखनऊ। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की "मित्र पुलिसिंग" और मानवीय संवेदनाओं का एक बेहद भावुक कर देने वाला उदाहरण सामने आया है। थाना काकोरी पुलिस टीम ने मुस्तैदी और कड़ी विधिक पैरवी दिखाते हुए चार दिन पहले लापता हुए एक मूक-बधिर (बोलने व सुनने में असमर्थ) मासूम बच्चे को सकुशल बरामद कर उसके रोते-बिलखते परिजनों से मिला दिया है। अपने कलेजे के टुकड़े को सही-सलामत वापस पाकर परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। परिजनों ने काकोरी पुलिस की त्वरित विधिक कार्रवाई और संवेदनशीलता की खुले कंठ से सराहना करते हुए पूरी टीम को कोटि-कोटि धन्यवाद दिया है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, बीते १६ मई २०२६ को थाना जानकीपुरम क्षेत्र से यह मासूम बच्चा अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। काफी खोजबीन के बाद जब बच्चा नहीं मिला, तो परिजनों द्वारा थाना जानकीपुरम में उसकी विधिक गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। बच्चा बोलने और सुनने में पूरी तरह असमर्थ होने के कारण राह भटकते हुए काकोरी क्षेत्र में आ गया था, जो गश्त (पेट्रोलिंग) के दौरान काकोरी पुलिस की सजग टीम को लावारिस हालत में घूमता हुआ मिला था।
| 👮 ऑपरेशन का विधिक नेतृत्व | 🔍 पुलिस द्वारा किए गए विधिक प्रयास |
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• श्री सतीश चन्द्र राठौर (प्रभारी निरीक्षक / SHO, थाना काकोरी) • श्री सुरजीत कुशवाहा (उपनिरीक्षक / S.I.) • अजीत सिंह (आरक्षी / कांस्टेबल) |
• मूक-बधिर होने के कारण बच्चा अपना नाम-पता बताने में असमर्थ था। • काकोरी पुलिस ने डिजिटल नेटवर्क, वायरलेस और सोशल मीडिया ग्रुप्स के जरिए शिनाख्त के सभी संभव विधिक प्रयास किए। • जानकीपुरम थाने से विधिक संपर्क स्थापित कर गुमशुदगी रिकॉर्ड का मिलान किया गया और परिजनों को ढूंढ निकाला गया। |
परिजनों की विधिक पहचान की पुष्टि होने के बाद, आज २० मई २०२६ को थाना काकोरी परिसर में प्रभारी निरीक्षक सतीश चन्द्र राठौर की उपस्थिति में बच्चे को विधिक सुपुर्दगी प्रपत्र भरने के उपरांत उनके माता-पिता को सकुशल सुपुर्द कर दिया गया। चार दिनों से घर के चिराग के खो जाने के गम में डूबे माता-पिता अपने बच्चे को देखते ही उसे गले से लगाकर रो पड़े। उन्होंने कहा कि काकोरी पुलिस की सक्रियता के कारण ही आज उनका बच्चा सुरक्षित घर लौट सका है, जिसके लिए वे कमिश्नरेट पुलिस के सदैव ऋणी रहेंगे।
"जब यह बच्चा हमें गश्त के दौरान मिला, तो यह डरा हुआ था और मूक-बधिर होने के कारण कुछ बोल नहीं पा रहा था। हमारी टीम ने सबसे पहले उसे भोजन कराया और अपनेपन का अहसास दिया। हमारी सर्विलांस और बीट टीम ने तुरंत लखनऊ के सभी थानों में दर्ज बच्चों की गुमशुदगी का विधिक मिलन शुरू किया, जिससे इसकी पहचान हो सकी। किसी बिछड़े बच्चे को उसके मां-बाप से मिलाना हमारी विधिक ड्यूटी से ऊपर उठकर एक पवित्र मानवीय कार्य है।"
पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने इस सुखद मिलन के बाद आम नागरिकों से विशेष अपील की है कि वे अपने घरों के छोटे बच्चों, विशेषकर जो दिव्यांग या बोलने-सुनने में असमर्थ हैं, उनके पहनावे या जेब में एक पहचान कार्ड अथवा संपर्क नंबर विधिक रूप से अवश्य रखें। काकोरी पुलिस टीम के इस उत्कृष्ट, संवेदनशील और मानवीय कार्य की लखनऊ के प्रबुद्ध सामाजिक संगठनों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा भी भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है।
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शाहजहांपुर
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