लखनऊ। जनपद के ग्रामीण आंचलिक क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य प्रणालियों के अंतर्गत सरकारी परिसरों की सुरक्षा, आपातकालीन जीवन रक्षक वाहनों के रख-रखाव तथा आपदा प्रबंधन की नोडल तैयारियों को लेकर एक गंभीर विसंगतिपूर्ण मामला सामने आया है। लखनऊ जिले के इटौंजा क्षेत्र स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) परिसर में खड़ी एक एम्बुलेंस गाड़ी में संदिग्ध एवं अज्ञात कारणों के चलते अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी गाड़ी को अपनी कस्टडी में ले लिया। परिसर में मची भारी अफरा-तफरी के बीच सूचना पाकर मौके पर पहुंची दमकल विभाग (Fire Brigade) की गाड़ी ने काफी मशक्कत के बाद आग पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया।
🏬 अस्पताल परिसर में खड़ी गाड़ी बनी आग का गोला, स्टाफ के छूटे पसीने:
प्राप्त प्रामाणिक नोडल विलेख के अनुसार, इटौंजा सीएचसी के मुख्य पार्किंग स्टैंड पटल पर जीवन रक्षक एम्बुलेंस वाहन नियमित रोस्टर के तहत खड़ा था। इसी दौरान अज्ञात तकनीकी खामी अथवा शॉर्ट सर्किट के चलते इंजन प्रभाग से धुएं का गुबार उठने लगा और चंद मिनटों में वाहन धू-धू कर जलने लगा। अस्पताल स्टाफ द्वारा कलेक्ट्रेट आपातकालीन सेल व अग्निशमन कमान को दी गई रीयल-टाइम सूचना के बाद दमकल कर्मियों ने मोर्चा संभाला और लपटों को मुख्य चिकित्सा वार्डों तक फैलने से पहले ही शांत कर दिया।
| 📊 घटना स्थल एवं रेस्क्यू नोडल विवरण | ⚠️ परिलक्षित लापरवाही एवं संभावित विसंगति |
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• हादसा स्थल प्रविष्टि: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) इटौंजा परिसर, लखनऊ। • आग का प्राथमिक स्वरूप: अज्ञात विलेखीय कारणों से भड़की अचानक भीषण आग। • कंट्रोल रूम ऐक्शन: सीएचसी स्टाफ की नोडल सूचना पर तत्काल पहुंची फायर टेंडर गाड़ी। • विधिक राहत: कोई जनहानि नहीं, आग पर समय रहते पूर्णतः काबू पाया गया। |
• रख-रखाव में चूक: आपातकालीन वाहनों की नियमित तकनीकी फिटनेस सर्विलांस का अभाव। • फायर ऑडिट विसंगति: परिसर के भीतर स्थापित अग्निशमन यंत्रों के क्रियान्वयन पर सवाल। • संभावित कारण विलेख: अत्यधिक गर्मी के चलते इंजन ओवरहीटिंग अथवा वायरिंग शॉर्ट सर्किट। |
इस संवेदनशील अग्निकांड ने स्वास्थ्य विभाग के आउटर मैनेजमेंट और वेंडर कंपनियों के दावों की विसंगतिपूर्ण पोल खोल कर रख दी है। प्रत्यक्षदर्शियों एवं स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जीवन रक्षक वाहनों में ऑक्सीजन सिलेंडर जैसे अत्यधिक ज्वलनशील उपकरण मौजूद होते हैं, ऐसे में खड़ी गाड़ी में आग लगना किसी गंभीर विभागीय लापरवाही की ओर सीधे इशारा करता है। यदि यह हादसा किसी मरीज के ट्रांसिट विलेख के दौरान ऑन-रूट हुआ होता, तो गंभीर विभीषिका उत्पन्न हो सकती थी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कमान द्वारा इस तकनीकी चूक की विलेख जांच हेतु एक नोडल कमेटी गठित की जा रही है।
"इटौंजा सीएचसी परिसर के भीतर खड़ी एम्बुलेंस में आग लगने की घटना को जिला प्रशासन ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। हालांकि फायर कमान ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए आग को बुझा दिया और अस्पताल भवन को सुरक्षित बचा लिया, परंतु एम्बुलेंस प्रदाता आउटसोर्सिंग एजेंसी के तकनीकी सर्विलांस में घोर शिथिलता परिलक्षित हुई है। जनपद के समस्त ग्रामीण व नगरीय चिकित्सा केंद्रों पर तैनात एम्बुलेंसों की फिटनेस प्रविष्टि और उनके भीतर लगे अग्निशमन यंत्रों की रीयल-टाइम जांच के कड़े विलेख रोस्टर जारी किए जा रहे हैं। यदि जांच रिपोर्ट में वेंडर कंपनी या स्थानीय प्रबंधन की विसंगति प्रमाणित होती है, तो कलेक्ट्रेट निर्देशों के तहत उनके विरुद्ध दंडात्मक प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।" — जनपद स्वास्थ्य सुशासन एवं सुरक्षा प्रभाग बुलेटिन
इटौंजा कस्बा बाजार, सीतापुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग ग्रिड, बख्शी का तालाब (BKT) सर्किल, महोना व कुम्हरावां आउटर अंचल, कलेक्ट्रेट जनसुनवाई पटल और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक वेलफेयर कमेटियों, संभ्रांत व्यापारियों तथा अधिवक्ताओं ने इटौंजा पुलिस व फायर फाइटर्स द्वारा समय रहते आग पर काबू पाकर बड़ी दुर्घटना टालने के इस मुस्तैद विधिक कदम की सराहना की है, परंतु साथ ही चिकित्सालयों की सुरक्षा ग्रिड में व्यापक सुधार की मांग बुलंद की है। 'सच की आवाज वेब न्यूज' भी कमान स्तर से निष्पक्ष तकनीकी जांच की पैरवी करता है। जिला आपातकालीन प्रबंधन सेल ने पुनः संपूर्ण विभागीय वाहन स्वामियों व चालकों से विधिक व विनम्र अपील की है कि वे भीषण गर्मी के इस मौसम में वाहनों के कूलेंट स्तर, वायरिंग सुरक्षा और परमिट विलेखों की नियमित भौतिक जांच सुनिश्चित करें। यदि किसी भी सरकारी या निजी परिसर में खड़े वाहनों से संदिग्ध धुआं, तेल रिसाव अथवा कोई अमर्यादित विसंगति परिलक्षित हो, तो स्वयं अनाड़ी प्रयोग न करें; तत्काल इसकी प्रामाणिक सूचना स्थानीय दमकल केंद्र, संबंधित नोडल अधिकारी अथवा आपातकालीन रिस्पॉन्स कमान **'१०१' या '११२'** पर प्रेषित करें। आपकी समयबद्ध सजगता ही सार्वजनिक सुशासन का अभेद्य ढाल है।
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