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काकोरी के सकरा में गरजी किसान महापंचायत: शिवरी के समान ₹१.२० करोड़...

 

🌾 किसान कमान अधिकार मोर्चा / एलडीए भूमि अधिग्रहण विसंगति
✍️ ब्यूरो रिपोर्ट: आनंद कुमार, लखनऊ
📅 काकोरी (लखनऊ) | 25 मई, 2026
🌐 सच की आवाज वेब न्यूज — सकरा ग्राम पंचायत विशेष: राष्ट्रीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक का महा-आह्वान, एलडीए कलेक्ट्रेट भूमि रोस्टर को चुनौती, आबादी व श्मशान भूमि बचाने का विधिक संकल्प

खनऊ। अन्नदाताओं के विधिक भूमि अधिकारों के संरक्षण, विकास योजनाओं के नाम पर किसानों के साथ होने वाली विसंगतिपूर्ण आर्थिक असमानता को समूल समाप्त करने तथा एलडीए (LDA) कलेक्ट्रेट अधिभोग नीतियों के विरोध में ग्रामीण अंचल पूरी तरह आंदोलित हो उठा है। इसी नोडल प्रविष्टि के तहत आज २५ मई २०२६ को विकास खंड काकोरी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सकरा में एक विशाल व महत्वपूर्ण किसान महापंचायत सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक में जुटे सैकड़ों भूमि स्वामियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष **श्री राकेश सिंह चौहान जी** ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रशासनिक विसंगतियों के विरुद्ध अपनी मांग मनवाने के लिए किसानों की अभेद्य एकजुटता ही हमारा एकमात्र विधिक हथियार है।

📌 एक ही मेड़ होने के बावजूद मुआवजे में भारी भेदभाव, सकरा प्रधान ने किया महा-आह्वान:

महापंचायत पटल पर सकरा ग्राम प्रधान ने उपस्थित समस्त कृषकों से विलेखीय अपील की कि वे अपनी सामूहिक शक्ति को पहचानें तथा आगामी रविवार को होने वाली नोडल अनुवर्ती बैठक में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कलेक्ट्रेट चौपाल के समक्ष अपनी अटूट एकता का प्रदर्शन करें। किसानों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि मोहन रोड और काकोरी रोड मुख्य हाईवे ग्रिड से सीधे जुड़े होने के बावजूद यहाँ का सर्किल रेट विसंगति का शिकार है।

📜 एलडीए भूमि अधिग्रहण मुआवजा विसंगति एवं किसान मांग मैट्रिक्स:
📊 ग्राम पंचायत शिवरी बनाम सकरा अधिभोग विलेख ⚖️ किसानों की मुख्य विधिक व प्रशासनिक शर्तें
भौगोलिक विलेख साक्ष्य: शिवरी और सकरा ग्राम सभा की सीमाएं (मेड़) आपस में पूरी तरह संबद्ध हैं।
शिवरी ग्राम मुआवजा दर: ₹१ करोड़ २० लाख प्रति बीघा निर्धारित।
सकरा ग्राम प्रस्तावित दर: मात्र ₹४२ लाख प्रति बीघा तय (किसानों के साथ सरासर अन्याय)।
मुख्य विधिक मांग: मेड़ से जुड़े पड़ोसी गांवों के बराबर तत्काल उचित नोडल मुआवजा दिया जाए।
अल्टीमेटम क्लॉज: यदि समान वित्तीय दर संभव नहीं, तो किसानों की कृषि भूमि को टाउनशिप योजना से **तत्काल बाहर** किया जाए।
सार्वजनिक कस्टडी सुरक्षा: ग्रामीण आबादी, पुश्तैनी मकान, श्मशान घाट और खेल मैदानों को योजना से पृथक रखा जाए।
🛡️ आबादी, श्मशान और खेल के मैदानों पर कतई कब्जा नहीं होने देंगे: राकेश सिंह चौहान

किसान यूनियन लोकतांत्रिक की कोर कमेटी ने स्पष्ट किया कि एलडीए द्वारा प्रस्तावित महा-योजना की आड़ में ग्रामीणों के पारंपरिक बुनियादी ढांचे जैसे खेल के मैदान, पुश्तैनी श्मशान घाट और सघन आबादी वाले रिहायशी मकानों को विसंगतिपूर्ण तरीके से अधिग्रहित करने की चेष्टा की जा रही है। यदि लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के आला नोडल अधिकारी धरातल पर उतरकर किसानों के विलेख साक्ष्यों का पारदर्शी मूल्यांकन नहीं करते हैं, तो कलेक्ट्रेट और कमिश्नरेट मुख्यालय के मुख्य द्वारों पर अनिश्चितकालीन महा-पिकेटिंग और विधिक धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

पड़ोसी गांव को सवा करोड़ और हमें कौड़ियों के दाम—यह तानाशाही एलडीए सुशासन में नहीं चलेगी

"कृषकों की उपजाऊ भूमि कोई बेजान विलेख या मिट्टी का ढेर नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों की आजीविका और ग्रामीण अस्तित्व की अभेद्य रीढ़ है। जब शिवरी और सकरा की मेड़ एक है, दोनों का कमर्शियल सर्विलांस और मार्ग ग्रिड साझा है, तो मुआवजे की दरों में ३ गुना का विसंगतिपूर्ण अंतर सीधे-सीधे सुशासनात्मक नियमों का उल्लंघन है। हम विकास के विरोधी नहीं हैं, परंतु किसानों की छाती पर बुल्डोजर चलाकर कंक्रीट के जंगल खड़े करने की इजाजत कतई नहीं देंगे। एलडीए कमान सुन ले—या तो हमें ₹१.२० करोड़ प्रति बीघा का समान वैधानिक हक दिया जाए, अन्यथा हमारी सीमा प्रविष्टि से अपनी टाउनशिप योजना का बोर्ड उखाड़ लें। हमारे श्मशान और खेल के मैदान हमारी सामाजिक कस्टडी में सुरक्षित रहेंगे।" — राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश सिंह चौहान

सकरा ग्राम पंचायत चौराहा, शिवरी संपर्क अंचल, काकोरी ऐतिहासिक कस्बा बाजार, मोहन रोड बाईपास ग्रिड, मलिहाबाद फल पट्टी प्रभाग, लखनऊ कलेक्ट्रेट जनसुनवाई पटल और उच्च न्यायालय व कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के सम्मानित प्रबुद्ध अधिवक्ताओं, विभिन्न प्रगतिशील किसान कमेटियों तथा प्रबुद्ध नागरिकों ने राष्ट्रीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक द्वारा अन्नदाताओं के हक में उठाए गए इस पारदर्शी, कड़क और विधिक कदम की खुले दिल से सराहना की है। सकरा ग्राम सभा समन्वय सेल ने पुनः समस्त क्षेत्रीय किसानों, बटाईदारों व प्रबुद्ध ग्रामीणों से वैधानिक व विनम्र अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक हक की लड़ाई में किसी भी प्रकार की भ्रामक अफवाहों या बिचौलियों की विसंगतिपूर्ण चालों में बिल्कुल न आएं। आगामी रविवार की महापंचायत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर कमान व्यवस्था को मजबूत बनाएं और सुशासन राज में शांतिपूर्ण, मर्यादित एवं पूर्ण विलेखीय लोकतांत्रिक तरीके से अपनी जायज मांगों को शासन के शीर्ष पटल तक प्रेषित करें। आपकी सजगता और एकजुटता ही आपके बच्चों के भविष्य और पुश्तैनी जमीनों की अभेद्य ढाल है।

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📈 बुलंद किसान आवाज, पारदर्शी सुशासन — प्रशासनिक विसंगतियों का समूल विधिक नाश, ग्रामीण अंचलों का सतत मैदानी सर्विलांस और प्रत्येक अन्नदाता के विधिक व बुनियादी भूमि अधिकारों के संरक्षण हेतु सदैव समर्पित 'सच की आवाज'।

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