शाहजहाँपुर। ग्राम पंचायतों में सुशासन को कलेक्टिव रूप से सुदृढ़ करने और भ्रष्टाचार को कड़ाई से कुचलने के लिए जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। आज दिनांक 04 जून 2026 को जिलाधिकारी की गरिमामयी अध्यक्षता में पंचायतीराज विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायतराज अधिकारी (DPRO) ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि जनपद की विभिन्न ग्राम पंचायतों में तैनात पंचायत सहायकों द्वारा जनसेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से प्राप्त सरकारी धनराशि को ओ०एस०आर० (OSR) खाते में जमा न कर, कलेक्टिव रूप से उसका घोर गबन कर लिया गया है।
विलेखीय रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों द्वारा आय, जाति, निवास आदि प्रमाण पत्र प्रदान करने वाली सेवाओं से प्राप्त आय को नियमानुसार ग्राम पंचायतों के ओ०एस०आर० (OSR) खाते में कड़ाई से जमा करना होता है। परंतु घोर वित्तीय अनियमितता बरतते हुए पंचायत सहायकों द्वारा वर्ष 2025-26 में सेवाओं से प्राप्त कलेक्टिव आय ₹11.31 लाख एवं चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्राप्त ₹74,000/- (कुल मिलाकर ₹12.05 लाख) की सरकारी धनराशि को खाते में जमा ही नहीं किया गया। इस पूरी धनराशि का पंचायत सहायकों द्वारा कलेक्टिव रूप से व्यक्तिगत उपयोग कर लिया गया, जो सीधे तौर पर आपराधिक गबन की श्रेणी में आता है।
• ⏳ 12 जून तक का कड़ा अल्टीमेटम: जिलाधिकारी ने उक्त पूरी दुरुपयोग की गई धनराशि (Short Fall) को आगामी 12 जून, 2026 तक हर हाल में ग्राम पंचायतों के ओ०एस०आर० खाते में कड़ाई से वापस जमा कराने का कमान आदेश दिया है।
• ❌ सीधे सेवा समाप्ति का विलेख निर्देश: डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने दोटूक कड़े निर्देश जारी किए हैं कि जो भी पंचायत सहायक निर्धारित तिथि (12 जून) तक गबन की गई राशि जमा नहीं कराएगा, उसकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएगी।
• 🏛️ बीडीओ व एडीओ को कलेक्टिव जिम्मेदारी: समस्त सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) एवं खंड विकास अधिकारियों (BDO) को व्यक्तिगत रूप से कमान सौंपते हुए इस वसूली विलेख को कड़ाई से शत-प्रतिशत पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
| 📅 वित्तीय वर्ष विवरण | 💰 गबन की गई कलेक्टिव धनराशि | 🚨 डीएम का कड़ा विलेख निर्देश |
|---|---|---|
| वित्तीय वर्ष 2025-26 | 📉 ₹11.31 लाख (गबन/व्यक्तिगत उपयोग) |
⏳ 12 जून, 2026 तक खाते में राशि वापस जमा न करने पर "सीधे सेवा समाप्ति" |
| वित्तीय वर्ष 2026-27 | 📉 ₹74,000/- (गबन/व्यक्तिगत उपयोग) |
पंचायतीराज विभाग की विलेखीय बैठक में प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनता द्वारा प्रमाण पत्रों के एवज में दी गई फीस सीधे तौर पर ग्राम पंचायत के विकास कोष का हिस्सा होती है। पंचायत सहायकों द्वारा इसका कलेक्टिव दुरुपयोग किया जाना सरकारी नियमों का घोर उल्लंघन है। जिलाधिकारी की इस कड़क कमान कार्रवाई के बाद से पूरे महकमे में और जनपद के समस्त पंचायत सहायकों में हड़कंप मच गया है।
"जनता के पैसे का व्यक्तिगत उपयोग और गबन किसी भी कमान स्तर पर अक्षम्य है। ओ०एस०आर० खाते में जमा होने वाली प्रत्येक पाई का कलेक्टिव ऑडिट कराया जाएगा। एडीओ पंचायत और खंड विकास अधिकारी कड़ाई से इस शॉर्ट फॉल की रिकवरी सुनिश्चित करें। 12 जून के बाद विलेखीय रूप से चूक करने वाले किसी भी दोषी पंचायत सहायक को कार्य पर बने रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होगा।"
'सच की आवाज' वेब न्यूज के माध्यम से हमारे कमान कलेक्टिव स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव ने इस भ्रष्टाचार विरोधी विलेखीय महा-अभियान की समीक्षा करते हुए बताया कि जिलाधिकारी का यह कड़ा हंटर विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए बेहद मील का पत्थर साबित होगा। सरकारी राजस्व को अपनी जागीर समझने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध इस प्रकार का कलेक्टिव कमान एक्शन अत्यंत सराहनीय और आवश्यक है।
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