लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन की आधुनिक 'स्मार्ट पुलिसिंग' नीति, कलेक्ट्रेट डिजिटल डेटाबेस सुरक्षा चार्टर तथा लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा आपराधिक विलेखों के त्वरित तकनीकी निस्तारण हेतु चलाए जा रहे विशेष सुशासनात्मक अभियान के अनुपालन में प्रांतीय राजधानी के दक्षिणी ज़ोन में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक महा-बैठक संपन्न हुई। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) दक्षिणी एवं अपर पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) दक्षिणी के नोडल नेतृत्व में दक्षिणी ज़ोन के अंतर्गत आने वाले सभी थानों में नियुक्त समस्त कंप्यूटर ऑपरेटरों की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई। इस कार्यशाला सह बैठक में विधिक साक्ष्यों के ऑनलाइन संकलन तथा समन तामीली की डिजिटल प्रविष्टि को लेकर कड़े व आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
प्राप्त प्रामाणिक आधिकारिक विलेख विवरण के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के कड़े तकनीकी क्लॉज के व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर यह बैठक अत्यंत संवेदनशील थी। उच्चाधिकारियों ने थानों के तकनीकी दस्ते को पाबंद किया कि विवेचना से जुड़े हर डिजिटल साक्ष्य को 'E-साक्ष्य' एप्लीकेशन पर पूरी शुचिता के साथ अपलोड किया जाए। इसके साथ ही, माननीय न्यायालयों द्वारा जारी होने वाले वारंट व समन की शत-प्रतिशत रीयल-टाइम तामीली हेतु 'E-सम्मन' तथा पुलिस गश्त व आंतरिक कमान सर्विलांस की प्रविष्टि हेतु 'यक्ष ऐप' के उपयोग की गहन तकनीकी समीक्षा की गई, ताकि विवेचना विलेखों में कोई डिफाल्टर विसंगति न उत्पन्न हो सके।
| 📊 लक्षित तकनीकी सॉफ्टवेयर एवं डिजिटल नोड विवरण | ⚙️ प्रशासनिक कमान निर्देश एवं डेटा कस्टडी क्लॉज |
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• सीसीटीएनएस (CCTNS) प्रभाग: एफआईआर, जीडी एवं प्रगणक विलेखों का शत-प्रतिशत ऑनलाइन प्रेषण लॉक. • ई-साक्ष्य एवं यक्ष ऐप ग्रिड: क्राइम सीन के फोटो, वीडियो व रीयल-टाइम डिजिटल साक्ष्यों का अभेद्य कस्टडी भंडारण. • ई-सम्मन नोड ट्रैकिंग: न्यायिक समन के तामीला विलेख की ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करना. |
• शीर्ष कमान नेतृत्व: पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी) एवं अपर पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी), लखनऊ. • लक्षित मानव संसाधन: दक्षिणी ज़ोन के समस्त थानों में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर सिंडिकेट. • मूल सुशासनात्मक ध्येय: मैन्युअल विसंगति को समूल समाप्त कर तकनीकी रूप से पारदर्शी विवेचना विलेख पूर्ण करना. |
बैठक के दौरान आलाकमान ने स्पष्ट निर्देश दिए कि थानों के कंप्यूटर पटल पर लंबित रहने वाले विलेखों की दैनिक रिपोर्ट सीधे डीसीपी कार्यालय को भेजी जाए। यदि किसी भी थाने में सीसीटीएनएस पोर्टल पर डेटा प्रविष्टि में विलंब या लापरवाही की अमर्यादित विसंगति पाई गई, तो संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर के विरुद्ध तत्काल विभागीय अनुशासनात्मक ऐक्शन लिया जाएगा। इस डिजिटल बदलाव से न केवल पुलिसिंग में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आम फरियादियों व पीड़ितों को भी त्वरित विधिक न्याय सुलभ हो सकेगा।
"लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट का दक्षिणी ज़ोन अपराध नियंत्रण के साथ-साथ डिजिटल गवर्नेंस के विलेखों को धरातल पर उतारने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है। ई-साक्ष्य और ई-सम्मन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, बल्कि नए विधिक कानूनों के अनिवार्य कमान क्लॉज हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर थानों की तकनीकी रीढ़ हैं, इसलिए उन्हें रीयल-टाइम डेटा कस्टडी मैनेजमेंट में शत-प्रतिशत सटीकता बरतनी होगी। साक्ष्यों के डिजिटल चेन-ऑफ-कस्टडी में किसी भी स्तर पर डिफाल्टर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तकनीक के माध्यम से प्रत्येक नागरिक के जान-माल व विधिक अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करना ही हमारा अंतिम ध्येय है।" — दक्षिणी परिक्षेत्र कानून व्यवस्था एवं डिजिटल पुलिसिंग कमान बुलेटिन
दक्षिणी ज़ोन मुख्य कलेक्ट्रेट संभाग, आशियाना व सरोजनीनगर कोतवाली परिक्षेत्र, मोहनलालगंज व सुशांत गोल्फ सिटी संपर्क मार्ग ग्रिड, पीजीआई व आउटर रिंग रोड सर्किल, विकास भवन जनसुनवाई पटल और माननीय उच्च न्यायालय व जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के सम्मानित प्रबुद्ध अधिवक्ताओं, संभ्रांत व्यापारिक मंडलों, विभिन्न कंप्यूटर तकनीकी काउंसिलों तथा जागरूक नागरिक सुरक्षा समितियों ने 'सच की आवाज वेब न्यूज' के माध्यम से हाई-टेक पुलिसिंग की इस कड़क प्रशासनिक समीक्षा को प्रमुखता से प्रसारित करने की मुक्तकंठ से सराहना की है। कलेक्ट्रेट नागरिक सुरक्षा एवं लोक व्यवस्था समन्वय सेल ने पुनः समस्त प्रबुद्ध जनता व जागरूक नागरिकों से वैधानिक व विनम्र अपील की है कि वे थानों में अपनी शिकायतों के विलेख दर्ज कराते समय अपने वैध मोबाइल नंबर व डिजिटल पहचान प्रविष्टियों को अवश्य लॉक कराएं, ताकि आईजीआरएस (IGRS) व सीसीटीएनएस के माध्यम से उन्हें केस की रीयल-टाइम प्रगति स्टेटस प्राप्त हो सके। यदि आपके अंचल, थानों के डिजिटल काउंटरों, या कंप्यूटर कक्षों के भीतर कर्मियों द्वारा अवैध सुविधा शुल्क की मांग, जनसुनवाई बयानों की अमर्यादित अवहेलना, या कलेक्ट्रेट सुरक्षा मानकों की अनदेखी परिलक्षित हो, तो मूकदर्शक न रहें; तत्काल इसकी प्रामाणिक गोपनीय सूचना संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) कार्यालय, पुलिस उपायुक्त पटल या सीधे मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल '1076' पर प्रेषित करें। आपकी समयबद्ध सजगता ही सुशासित लखनऊ के सुरक्षित व पारदर्शी कल की अभेद्य ढाल है।
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शाहजहांपुर
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