ब्यूरो रिपोर्ट सीमा मौर्या उन्नाव ✍️
उन्नाव। भारतीय जनता पार्टी के विधायक एवं प्रदेश की स्थानीय निकायों के लेखा परीक्षण प्रतिवेदनों की जांच संबंधी समिति के सभापति पंकज गुप्ता ने जिला पंचायत उन्नाव में तैनात एक बाबू के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए लोकायुक्त उत्तर प्रदेश को पत्र भेजकर जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
विधायक द्वारा 31 जुलाई 2026 को भेजे गए पत्र में जिला पंचायत उन्नाव में तैनात मनोज कुमार पाल पर कथित रूप से भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। पत्र में आरोप है कि जिला पंचायत में आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल मानचित्र पास करने की प्रक्रिया में अनियमितता बरती जा रही है।
बगैर मानचित्र पास कराए प्लाटिंग कराने का आरोप
विधायक ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि जिला पंचायत उन्नाव में कई वर्षों से मानचित्र शुल्क लागू होने के बावजूद बगैर मानचित्र पास कराए अवैध प्लाटिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ फर्मों को जनपद में प्लाटिंग एवं अन्य कार्यों के लिए अनुमति दी गई, लेकिन कार्यालय की जानकारी के बिना निजी हितों की पूर्ति के लिए नियमों का उल्लंघन किया गया।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित अनियमितताओं के कारण जिला पंचायत की आय प्रभावित हो रही है।
निजी हितों के लिए सरकारी नियमों की अनदेखी का आरोप
विधायक ने लोकायुक्त को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि संबंधित कर्मचारी द्वारा अपने एवं अपनी पत्नी तथा परिजनों के नाम पर कई संपत्तियां अर्जित की गई हैं और कुछ संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में भी अनियमितताओं की आशंका है।
पत्र में संबंधित कर्मचारी के जनपद मुख्यालय पर निवास न करने और प्रतिदिन बाहर से आवागमन करने का भी उल्लेख किया गया है। विधायक ने कहा है कि ऐसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात कर्मचारी के कार्यों की जांच आवश्यक है।
मानचित्र पास कराने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
विधायक ने लोकायुक्त से यह भी जानने और जांच कराने का अनुरोध किया है कि अब तक कितने मानचित्र पास कराने के लिए नोटिस जारी किए गए, कितने आवेदन प्राप्त हुए और कितने मानचित्र स्वीकृत हुए। साथ ही कितने मानचित्र लंबित हैं और किन कारणों से लंबित हैं, इसकी भी जांच की मांग की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मानचित्र पास कराने की प्रक्रिया में अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
मामले में विधायक ने पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन एवं प्रमुख सचिव पंचायतीराज विभाग को भी भेजी है।
हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब लोकायुक्त अथवा संबंधित विभाग द्वारा जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
