ब्यूरो रिपोर्ट प्रमोद मिश्रा
बलरामपुर। जनपद को कुपोषण मुक्त बनाने तथा बच्चों एवं महिलाओं के बेहतर पोषण और स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन के नेतृत्व में जिला प्रशासन, बलरामपुर एवं जोमैटो फीडिंग इंडिया के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत विकासखंड रेहरा बाजार की 21 ग्राम पंचायतों के 60 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को निःशुल्क ताजा, गर्म और पोषणयुक्त नाश्ता तथा दोपहर का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का शुभारंभ आगामी 2 अक्टूबर को केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह द्वारा विकासखंड रेहरा बाजार से किया जाएगा। कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जोमैटो फीडिंग इंडिया द्वारा रेहरा बाजार विकासखंड के अचलपुर चौधरी में केंद्रीय रसोई स्थापित की जाएगी। यहां निर्धारित पोषण मानकों और स्वच्छता के अनुरूप बच्चों के लिए प्रतिदिन ताजा एवं पौष्टिक भोजन तैयार किया जाएगा।
तैयार भोजन को पांच विशेष वाहनों के माध्यम से निर्धारित समय पर संबंधित आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। भोजन की आपूर्ति के दौरान गुणवत्ता, स्वच्छता और समयबद्ध वितरण पर विशेष निगरानी रखी जाएगी, ताकि बच्चों को नियमित रूप से गर्म एवं पौष्टिक भोजन मिल सके।
12 दिवसीय रोटेशन मेन्यू से मिलेगा विविधतापूर्ण भोजन
बच्चों को प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार का पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए 12 दिवसीय रोटेशन मेन्यू तैयार किया गया है। नाश्ते में सब्जियों एवं मूंगफली से युक्त पोहा, दूध का दलिया, इडली-सांभर, नारियल की चटनी, अमरंथ एवं केले की खीर, वेजिटेबल सेवई, गेहूं एवं रागी का दलिया, मौसमी फल तथा गुड़-चना जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए गए हैं।
वहीं दोपहर के भोजन में अरहर दाल तहरी, लस्सी, पालक-आलू की सब्जी, हरी मूंग दाल, चावल एवं रोटी, पालक-बेसन कढ़ी, चना-पालक दाल, कद्दू की सब्जी, पनीर-वेजिटेबल पुलाव, छोले, चावल और अन्य मौसमी सब्जियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस विविधतापूर्ण मेन्यू का उद्देश्य बच्चों को पर्याप्त प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, खनिज एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराना है। नियमित पौष्टिक भोजन से बच्चों के शारीरिक विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और सीखने की क्षमता में सुधार की अपेक्षा की जा रही है।
मातृ-शिशु पोषण पर भी विशेष जोर
कार्यक्रम के तहत केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित न रहकर आंगनबाड़ी केंद्रों को पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक बाल विकास के प्रभावी केंद्रों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। छह माह से तीन वर्ष तथा तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के साथ ही गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
लाभार्थियों को उनकी आयु और निर्धारित पोषण मानकों के अनुरूप पोषण संबंधी सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। गुणवत्तापूर्ण भोजन की नियमित उपलब्धता से अभिभावकों का आंगनबाड़ी केंद्रों के प्रति विश्वास बढ़ने तथा बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और अन्य आंगनबाड़ी सेवाओं से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
60 केंद्रों से शुरू होकर 218 केंद्रों तक विस्तार की योजना
समझौते के तहत कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में रेहरा बाजार विकासखंड के 60 आंगनबाड़ी केंद्रों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम के प्रदर्शन और उपलब्ध संसाधनों के मूल्यांकन के आधार पर भविष्य में इसका विस्तार 218 आंगनबाड़ी केंद्रों तक किए जाने की योजना है।
वर्तमान में 21 ग्राम पंचायतों के 60 आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन उपलब्ध कराने की तैयारियां चल रही हैं। कार्यक्रम के अनुभव, पोषण संबंधी परिणामों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर आगे विस्तार किया जाएगा।
फेस रिकग्निशन और डिजिटल निगरानी से होगी मॉनिटरिंग
कार्यक्रम की पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का भी उपयोग प्रस्तावित है। लाभार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए फेस रिकग्निशन आधारित प्रणाली तथा पोषण संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा।
बच्चों के वजन, लंबाई और अन्य शारीरिक मापदंडों का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाएगा। पोषण ट्रैकर के आंकड़ों तथा प्रारंभिक पोषण मूल्यांकन के आधार पर बच्चों की प्रगति की निगरानी की जाएगी, जिससे कुपोषण की स्थिति में सुधार का आकलन किया जा सके।
इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर एवं बाल विकास परियोजना अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक केंद्र पर भोजन की प्राप्ति का दैनिक सत्यापन और मासिक रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाएगी।
जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने कहा कि बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्ष उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में संतुलित और पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। जिला प्रशासन और जोमैटो फीडिंग इंडिया की संयुक्त पहल बच्चों के बेहतर पोषण, आंगनबाड़ी सेवाओं की प्रभावशीलता तथा सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित निगरानी और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा, ताकि इस पहल का लाभ लक्षित बच्चों एवं महिलाओं तक पहुंच सके। सरकारी तंत्र, सामाजिक संस्था और स्थानीय समुदाय की सहभागिता से कुपोषण जैसी चुनौती से निपटने का प्रयास किया जाएगा।
एमओयू के दौरान जोमैटो फीडिंग इंडिया के सीईओ अजीत सिंह, प्रोग्राम मैनेजर ऋषभ चोपड़ा एवं स्वप्नाली तथा केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

