पॉक्सो अधिनियम पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, विद्यार्थियों ने किया जीवंत नुक्कड़ नाटक

 

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश ✍️

शाहजहांपुर। स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संकाय स्थित विधिक सहायता केंद्र की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, शाहजहांपुर के तत्वावधान में पॉक्सो अधिनियम, 2012 को लेकर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और आमजन को उनके विधिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता तथा न्याय तक पहुंच के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जनपद एवं सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय, विशिष्ट अतिथि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेश कुमार शर्मा तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अपेक्षा सिंह मौजूद रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। विद्यार्थियों ने अतिथियों का चंदन तिलक, बैज और पुष्पकलिका भेंट कर स्वागत किया। डॉ. पवन कुमार गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय प्रस्तुत किया।

मुख्य अतिथि धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने पॉक्सो अधिनियम के उद्देश्य और बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने में इसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए केवल कानून का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रावधानों की जानकारी और प्रभावी अनुपालन भी जरूरी है। उन्होंने पॉक्सो मामलों में बच्चों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने, संवेदनशील तरीके से बयान दर्ज करने और आवश्यक परामर्श की व्यवस्था पर जोर दिया।

कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) अनुराग अग्रवाल ने कहा कि जागरूकता तभी सार्थक होती है, जब उसके साथ सकारात्मक दृष्टिकोण और तत्परता भी हो। उन्होंने विद्यार्थियों से पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों को समझने और समाज में बच्चों के अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से बच्चों के साथ संवेदनशील एवं विश्वासपूर्ण व्यवहार करने की अपील की।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेश कुमार शर्मा ने पॉक्सो अधिनियम के तहत बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों और विशेष कानूनी संरक्षण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 15(3) के तहत बच्चों एवं महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। पॉक्सो अधिनियम में बच्चों के अनुकूल न्यायिक प्रक्रिया, शिकायत, साक्ष्य और पीड़ित के संरक्षण की विशेष व्यवस्था है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अपेक्षा सिंह ने बताया कि पॉक्सो अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराध, यौन उत्पीड़न एवं बाल अश्लीलता से संरक्षण प्रदान करता है। उन्होंने बच्चों को गुड टच-बैड टच, अनुचित व्यवहार की रिपोर्टिंग और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कानून बालक और बालिका दोनों पर समान रूप से लागू होता है।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विधि अध्ययन संकाय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत “काश! किसी ने सुना होता” शीर्षक नुक्कड़ नाटक रहा। नाटक के माध्यम से पॉक्सो अधिनियम के तहत विधिक अधिकारों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक को प्रदीप कुमार सिंह ने तैयार किया।

अंत में विधि अध्ययन संकाय के प्रभारी डॉ. जयशंकर ओझा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति समाज के प्रत्येक वर्ग को जागरूक होना आवश्यक है।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अनिल कुमार, प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. दीप्ति गंगवार, अशोक कुमार, डॉ. प्रेम सागर, मृदुल शुक्ला, अजीत कुमार, सचिन कुमार, विजय सिंह, डॉ. अमरेंद्र सिंह, डॉ. अमित कुमार यादव, डॉ. ज्योत्सना गुप्ता, रूपल मिश्रा सहित समस्त शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

Previous Post Next Post