शाहजहांपुर: जड़ों से जुड़े रहकर ही प्रगति संभव: कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश ✍️

शाहजहांपुर: जड़ों से जुड़े रहकर ही प्रगति संभव: कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह

स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय में अंत्योदय दिवस पर कार्यक्रम आयोजित, ‘राष्ट्रीय पुनर्जागरण के अग्रदूत : पंडित दीनदयाल उपाध्याय’ पुस्तक का हुआ विमोचन

शाहजहांपुर, 25 सितंबर 2026। स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ की ओर से अंत्योदय दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन भारतीय समाज और राष्ट्र के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

कुलपति ने कहा कि अंत्योदय का मूल भाव समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना है। विश्वविद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, सेवा एवं संवेदनशीलता की भावना विकसित करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने कहा कि प्रगति के लिए आवश्यक है कि हम प्रत्येक परिस्थिति में अपनी जड़ों से जुड़े रहें। कुलपति ने राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को अपने व्यवहार एवं सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करें।

अंत्योदय समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा का संकल्प

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विनोबा भावे सेवा आश्रम के संस्थापक व संचालक श्री रमेश भैया ने कहा कि अंत्योदय केवल एक विचार नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी और सेवा का संकल्प है। उन्होंने सेवा कार्यों के माध्यम से समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने पर बल दिया।

उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता एवं सामाजिक सेवा के कार्यों में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया।

एकात्म मानववाद और अंत्योदय के विचारों पर चर्चा

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं वरिष्ठ आचार्य डॉ. अनुराग अग्रवाल ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय के विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के संतुलित एवं समग्र विकास पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि विकास का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक माना जा सकता है, जब उसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। डॉ. अग्रवाल ने विद्यार्थियों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, दर्शन एवं सामाजिक चिंतन का अध्ययन करने तथा उनके विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया।

पुस्तक का हुआ विमोचन

कार्यक्रम के दौरान कुलपति एवं अतिथियों द्वारा इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. दीपक सिंह एवं प्रो. सीमा गौतम द्वारा संपादित पुस्तक “राष्ट्रीय पुनर्जागरण के अग्रदूत : पंडित दीनदयाल उपाध्याय” का विमोचन किया गया। पुस्तक में एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया गया है।

इनकी रही मौजूदगी

कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. बरखा सक्सेना ने किया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक प्रमोद कुमार यादव ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर कला संकायाध्यक्ष प्रो. आलोक मिश्र, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. कमलेश गौतम, सहायक कुलसचिव श्री रामबाबू केसरवानी, प्रो. मधुकर श्याम शुक्ला, प्रो. पूनम, डॉ. विकास खुराना, डॉ. श्रीकांत मिश्रा, डॉ. दुर्गविजय, डॉ. अर्चना गर्ग, डॉ. पूजा बाजपेयी, डॉ. पद्मजा मिश्रा, श्रीमती प्रीती, श्री सौरभ मिश्र सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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