कुरआन शरीफ में अच्छे आचरण, न्याय और इंसानियत पर जोर: अधिवक्ता श्रद्धा शुक्ला

 

ब्यूरो चीफ आमिर मिर्जा, प्रयागराज ✍️

प्रयागराज। प्रयागराज निवासी एवं इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता श्रद्धा शुक्ला ने कुरआन शरीफ में बताए गए मानवीय मूल्यों, अच्छे आचरण, न्याय, दया और दूसरों के अधिकारों को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि कुरआन में इंसान को न्याय, भलाई, सम्मान और जरूरतमंदों की मदद करने की शिक्षा दी गई है।

अधिवक्ता श्रद्धा शुक्ला के अनुसार, कुरआन न्याय और निष्पक्षता पर विशेष जोर देता है। सूरह अल-माइदा 5:8 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विरोध या असहमति की स्थिति में भी न्याय से हटने की शिक्षा नहीं दी गई है।

उन्होंने बताया कि सूरह अल-इस्रा 17:23-24 में माता-पिता के साथ सम्मान और भलाई से पेश आने की हिदायत दी गई है। वहीं सूरह अल-बकरह 2:177 में जरूरतमंदों, अनाथों और गरीबों की सहायता को नेक कार्यों में शामिल किया गया है।

दान, माफी और भलाई पर जोर

उन्होंने कहा कि कुरआन में जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता और दान के महत्व का भी उल्लेख मिलता है। इसके लिए उन्होंने सूरह अल-बकरह 2:267 का संदर्भ दिया। इसी तरह सूरह फुस्सिलत 41:34 में बुराई का जवाब बेहतर तरीके से देने और माफ करने की भावना को महत्व दिया गया है।

अधिवक्ता ने बताया कि सूरह अन-निसा 4:36 में रिश्तेदारों, अनाथों, गरीबों और पड़ोसियों के साथ भलाई करने की शिक्षा दी गई है। वहीं सूरह अल-हुजुरात 49:13 में इंसानों के अलग-अलग जातियों और कबीलों में बनाए जाने तथा एक-दूसरे को पहचानने की बात कही गई है।

अच्छा आचरण और सम्मान जरूरी

श्रद्धा शुक्ला ने कहा कि किसी भी विचार या धर्म के नाम पर कट्टरता अपनाकर दूसरे व्यक्ति का अपमान करना या किसी दूसरे धर्म का मजाक उड़ाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, किसी भी धर्म की शिक्षाओं को समझने के लिए उसके मूल संदेश और मानवीय मूल्यों को देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनके विचार में एक सच्चा मुसलमान वह है जो अच्छे आचरण, लोगों के प्रति दया और सम्मान की भावना रखे तथा अपने देश के प्रति वफादार रहे। उन्होंने यह भी कहा कि इंसानियत, आपसी सम्मान और सद्भाव समाज को मजबूत बनाने के लिए जरूरी हैं।

उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि दुनिया को चलाने वाली शक्ति एक है और सभी लोगों के बीच सम्मान, दया और सद्भाव की भावना होनी चाहिए।

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