सहायक ब्यूरो चीफ सुधीर सिंह कुम्भाणी, सीतापुर ✍️
सीतापुर। विकासखंड सकरन की ग्राम पंचायत किरतापुर में ग्राम विकास कार्यों और मनरेगा भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पात्र मजदूरों की अनदेखी करते हुए प्रधान के करीबी और रिश्तेदारों को मजदूरी का भुगतान किया गया। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग जिलाधिकारी से की है।
भाई-भाभी के खातों में भुगतान का आरोप
ग्रामीणों के मुताबिक मामला डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामुदायिक केंद्र की मरम्मत एवं रंगाई-पुताई से जुड़े कार्य का है। आरोप है कि इस कार्य में ग्राम प्रधान के सगे भाई किशोरी लाल और उनकी पत्नी कोकिला देवी के बैंक खातों में मजदूरी की धनराशि का भुगतान किया गया, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि दोनों ने मौके पर काम नहीं किया था।
ग्रामीणों ने सरकारी अभिलेखों में दर्ज मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति और भुगतान की जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भुगतान किस आधार पर किया गया।
गौ आश्रय स्थल के कार्यों पर भी सवाल
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के अस्थायी गौ आश्रय स्थल में कराए गए कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वहां कराए गए कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हैं। ग्रामीणों ने सामुदायिक केंद्र के साथ-साथ गौ आश्रय स्थल और ग्राम पंचायत के अन्य विकास कार्यों की भी जांच कराने की मांग की है।
पात्र मजदूरों की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के गरीब और पात्र मजदूर मनरेगा में काम पाने के लिए परेशान हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों और रिश्तेदारों को मजदूरी भुगतान किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि मनरेगा के मस्टर रोल, भुगतान अभिलेख, बैंक खातों और मौके पर हुए कार्यों का सत्यापन कराया जाए।
बीडीओ से नहीं हो सकी वार्ता
मामले में खंड विकास अधिकारी, सकरन का पक्ष जानने के लिए संवाददाता ने फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनका मोबाइल फोन कवरेज क्षेत्र से बाहर बताया गया। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सीतापुर से ग्राम पंचायत किरतापुर के विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराकर यदि अनियमितता मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

