जिला गंगा समिति ने नमामि गंगे अभियान के तहत गोमती तट पर कराया विशेष कार्यक्रम
स्टेट हेड योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहांपुर। जिला गंगा समिति शाहजहांपुर के बैनर तले नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत विकासखंड पुवायां स्थित गोमती नदी के मस्तान घाट एवं मंदिर परिसर में विशेष स्वच्छता एवं श्रमदान अभियान चलाया गया। इस दौरान पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर घाट परिसर की सफाई की और नदी को स्वच्छ एवं निर्मल बनाए रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत लोकभारती के महानगर संयोजक आलोक मिश्रा, ग्राम प्रधान संजय त्रिपाठी, अधीर त्रिपाठी सहित अन्य पर्यावरण प्रेमियों, गोमती एवं भैंसी सेवकों और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा श्रमदान से हुई। सभी ने घाट परिसर में फैले कचरे, प्लास्टिक और गंदगी को हटाकर स्वच्छता का संदेश दिया।
घाट के किनारे लगाए छायादार और फलदार पौधे
नदी तट को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से घाट के किनारे छायादार एवं फलदार वृक्षों का रोपण किया गया। साथ ही लगाए गए पौधों के संरक्षण का संकल्प भी लिया गया, ताकि नदी के आसपास के पर्यावरण को बेहतर बनाया जा सके।
इस अवसर पर जिला परियोजना अधिकारी डॉ. विनय कुमार सक्सेना ने उपस्थित लोगों को गंगा और उसकी सहायक नदियों को निर्मल एवं अविरल बनाए रखने की स्वच्छता शपथ दिलाई। सभी ने संकल्प लिया कि वे नदी और घाटों पर गंदगी नहीं फैलाएंगे तथा अन्य लोगों को भी स्वच्छता एवं नदी संरक्षण के प्रति जागरूक करेंगे।
जनसहभागिता से ही सफल होगा नमामि गंगे अभियान
कार्यक्रम के दौरान ग्राम प्रधान संजय त्रिपाठी ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और जीवनरेखा है। नमामि गंगे परियोजना को सफल बनाने के लिए जनसहभागिता सबसे जरूरी है। जब तक आम नागरिक स्वयं आगे आकर नदियों की सफाई और संरक्षण की जिम्मेदारी नहीं उठाएंगे, तब तक यह अभियान अपने उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाएगा।
कार्यक्रम में जिला गंगा समिति के पदाधिकारियों के साथ पर्यावरण प्रेमी, छात्र और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। अंत में सभी ने मस्तान घाट को स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने की अपील की।
इस विशेष अभियान में लोकभारती, युवक मंगल दल फत्तेपुर बुजुर्ग और स्थानीय निवासियों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि नदियों का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी से संभव है।
