काकोरी, लखनऊ। काकोरी थाना क्षेत्र की समदा पुलिस चौकी अंतर्गत प्यारेपुर गांव में अनंत नगर योजना के तहत पेड़ काटने को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की टीम बिना पूर्व सूचना दिए और पेड़ों का उचित मुआवजा दिए बिना पेड़ काटने पहुंची थी। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो कथित तौर पर मारपीट हुई। आरोप यह भी है कि कुछ लोगों पर पेट्रोल डालकर जलाने का प्रयास किया गया। घटना में 11 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें राजीव कुंवर सिंह की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें इलाज के लिए लोकबंधु अस्पताल भेजा गया है।
उचित मुआवजा दिए बिना पेड़ काटने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, प्यारेपुर गांव में अनंत नगर योजना के तहत पेड़ काटने की कार्रवाई की जा रही थी। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें पहले से कोई सूचना नहीं दी गई और न ही पेड़ों के बदले उचित मुआवजा दिया गया। इसी बात को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया।
आरोप है कि विरोध के दौरान विवाद बढ़ गया और ग्रामीणों के साथ मारपीट की गई। ग्रामीणों ने पेट्रोल डालकर जलाने का प्रयास किए जाने का गंभीर आरोप भी लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और एलडीए पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है।
11 लोग घायल, राजीव कुंवर सिंह की हालत गंभीर
घटना के बाद घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बेहटा ले जाया गया। इनमें राजीव कुंवर सिंह (59 वर्ष) की हालत गंभीर बताई जा रही है। उन्हें बेहतर इलाज के लिए लोकबंधु अस्पताल भेजा गया है।
घायल बताए गए लोगों के नाम और उम्र: राजीव कुंवर सिंह (59 वर्ष), अमन (22 वर्ष), साहिल (19 वर्ष), पुतानी (35 वर्ष), श्याम लाल पाल (60 वर्ष), मुन्ना साहू (60 वर्ष), प्रेमा (42 वर्ष), जरीना (35 वर्ष), सुभाषिनी (55 वर्ष), संतोषा देवी (40 वर्ष) और निर्मला (45 वर्ष)।
ग्रामीणों ने उठाए मुआवजे और सुरक्षा से जुड़े सवाल
ग्रामीणों की ओर से पेड़ों के उचित मुआवजे, पेड़ काटने की कार्रवाई की जानकारी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के दौरान प्रभावित लोगों को नियमानुसार जानकारी दी जानी चाहिए और मुआवजे से जुड़े मामलों का उचित समाधान किया जाना चाहिए।
घटना में मारपीट और पेट्रोल डालकर जलाने के प्रयास के आरोप भी गंभीर हैं। ऐसे में पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। पेड़ काटने की अनुमति, मुआवजे की स्थिति और घटना के दौरान हुई कथित मारपीट की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
प्यारेपुर की इस घटना के बाद अब ग्रामीणों को प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। मामले में एलडीए और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पेड़ काटने की कार्रवाई तथा मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए मारपीट और पेट्रोल डालकर जलाने के प्रयास के आरोपों की निष्पक्ष जांच भी महत्वपूर्ण है।
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