लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र अंतर्गत मोहान रोड स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय परिसर में संचालित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा से जुड़ा एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां बैंक मित्र द्वारा खाताधारकों की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) में जमा लाखों रुपये के गबन का आरोप है, जिसे लेकर बैंक परिसर में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में कार्यरत बैंक मित्र ने कई खाताधारकों की एफडी बिना उनकी जानकारी के तोड़ दी और जमा धनराशि का दुरुपयोग कर लिया। जैसे ही इस घोटाले की भनक लोगों को लगी, बैंक परिसर में भारी संख्या में खाताधारक एकत्र हो गए।
बताया जा रहा है कि जो भी खाताधारक अपनी एफडी की जानकारी लेने बैंक पहुंच रहा है, उसे यह बताया जा रहा है कि उसकी एफडी पहले ही तोड़ी जा चुकी है, जबकि संबंधित खाताधारक को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई थी।
घटना सामने आने के बाद बैंक परिसर में मौजूद कई महिलाएं रोती-बिलखती नजर आईं। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवन भर की बचत, बच्चों की पढ़ाई, शादी और इलाज के लिए एफडी कराई थी, जो अब टूट चुकी है।
लोगों में इस बात को लेकर भी गहरी नाराजगी है कि इतना बड़ा घपला बैंक की जानकारी या लापरवाही के बिना कैसे संभव हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार, मामले में आरोपी बैंक मित्र को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की विधिक कार्रवाई पारा पुलिस द्वारा की जा रही है। पुलिस बैंक रिकॉर्ड, एफडी दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच में जुटी है।
प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, यह घोटाला करोड़ों रुपये का हो सकता है, हालांकि वास्तविक राशि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पीड़ितों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह घोटाला बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। बैंक परिसर में सुरक्षा, रिकॉर्ड सत्यापन और एफडी तोड़ने की प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
यह मामला केवल एक बैंक मित्र की धोखाधड़ी भर नहीं है, बल्कि यह बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि खाताधारकों की एफडी बिना उनकी जानकारी के तोड़ी गई है, तो यह एक प्रणालीगत विफलता का संकेत है। आम नागरिक अपनी मेहनत की कमाई बैंक पर भरोसा कर जमा करता है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं जनविश्वास को गहरी चोट पहुंचाती हैं।
शासन, बैंक प्रबंधन और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों को कठोर दंड दिलाया जाए और पीड़ितों की पूरी धनराशि सुरक्षित रूप से वापस कराई जाए। भरोसे की बहाली तभी संभव है जब न्याय स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
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