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इलाज में लापरवाही का आरोप: जच्चा-बच्चा की मौत से मचा हड़कंप, परिजनों का हंगामा

 

ब्यूरो चीफ शास्त्र तिवारी, बहराइच ✍️

बहराइच जनपद के पयागपुर क्षेत्र से एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां कथित चिकित्सकीय लापरवाही के चलते एक महिला और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका पूजा सिंह, पत्नी सर्वेश सिंह, निवासी बैदौरा थाना पयागपुर जनपद बहराइच, का इलाज गोंडा शहर स्थित जीवन दीप चिकित्सालय में चल रहा था। बताया जा रहा है कि 10 फरवरी की रात प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सक द्वारा सामान्य प्रसव संभव न होने की बात कहकर ऑपरेशन की सलाह दी गई।

11 फरवरी को ऑपरेशन के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई, जिसकी सूचना अस्पताल प्रशासन द्वारा परिजनों को दी गई। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की मौत के बाद भी महिला की हालत गंभीर होने के बावजूद उसे समय रहते किसी उच्च चिकित्सा केंद्र पर रेफर नहीं किया गया।

मृतका के परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने उपचार में लापरवाही बरती और गलत तरीके से खून चढ़ाया गया, जिससे महिला की स्थिति और बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार, खून चढ़ाने के बाद महिला को झनझनाहट और बेचैनी होने लगी, लेकिन डॉक्टरों ने स्थिति को सामान्य बताते हुए उचित कदम नहीं उठाए।

लगातार बिगड़ती हालत के बीच 15 फरवरी को महिला की भी मौत हो गई। जच्चा-बच्चा दोनों की मौत के बाद परिवार में मातम छा गया। वहीं, इस घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल परिसर में परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।

बताया जा रहा है कि मृतका का पति सर्वेश सिंह भारतीय सेना में श्रीनगर (कश्मीर) में तैनात है। घटना की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

पीड़ित परिवार ने कोतवाली नगर में तहरीर देकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि अस्पताल ने न तो सही मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध कराई और न ही उपचार से जुड़ी सही जानकारी दी।

पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और तहरीर के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर चिंता उत्पन्न करती है।

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