लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में रविवार शाम लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की विशेष बैठक में प्रदेश के आर्थिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक उत्तर प्रदेश के क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो को 62 प्रतिशत से अधिक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। वर्तमान में प्रदेश का सीडी रेशियो 60.39 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो विगत वर्षों का अब तक का सर्वोच्च स्तर है।
मुख्यमंत्री जी ने बैंकों से किसान, एमएसएमई इकाइयों, महिला स्वयं सहायता समूहों एवं युवा उद्यमियों को सरल, सुलभ और त्वरित ऋण उपलब्ध कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और ऋण वितरण में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
मुख्यमंत्री जी ने एक जनपद–एक उत्पाद (ODOP) योजना की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि अब एक जनपद–एक व्यंजन (ODoC) को भी ब्रांड के रूप में विकसित किया जाए। इस दिशा में बैंकों को अग्रणी भूमिका निभानी होगी, जिससे छोटे व्यापारियों, स्ट्रीट वेंडर्स और गिग वर्कर्स को नई पहचान के साथ वित्तीय मजबूती मिल सके।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश का कुल बैंकिंग व्यवसाय पिछले 8 वर्षों में ₹12.80 लाख करोड़ से बढ़कर ₹32.79 लाख करोड़ हो गया है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी स्थान पर है। जनधन खाते, बीमा एवं पेंशन योजनाओं में प्रदेश ने शीर्ष प्रदर्शन दर्ज किया है।
मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि ऊर्जा, कृषि, उद्योग एवं एमएसएमई क्षेत्रों में ₹22,000 करोड़ से अधिक के बड़े ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। आगामी 20 फरवरी एवं 16 मार्च को प्रस्तावित मेगा ऋण वितरण कार्यक्रमों में ₹2.20 लाख करोड़ से अधिक ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने बैंकों से कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से भी प्रदेश के विकास में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समन्वित प्रयासों से उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।
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