सुधीर सिंह कुम्भाणी, ब्यूरो रिपोर्ट सीतापुर ✍️
बिसवां/सीतापुर। Sitapur जिले के Biswan तहसील क्षेत्र में सरकारी तालाबों के पट्टों को लेकर किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। किसानों ने तहसील प्रशासन पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए आंदोलन का रास्ता अपनाने की घोषणा की है।
किसानों का आरोप है कि वर्ष 2020 में ग्राम समाज के तालाबों की नीलामी मछली पालन के लिए कराई गई थी, जिसमें उनसे लगान की धनराशि जमा कराई गई, लेकिन आज तक अधिकांश लोगों को पट्टा आवंटन पत्र नहीं दिया गया।
इस मामले को लेकर Bharatiya Kisan Union (जनमंच) इकाई सीतापुर के जिलाध्यक्ष राम शंकर सिंह ने उपजिलाधिकारी बिसवां को ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासनिक लापरवाही, कदाचार और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि तालाब पट्टा प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं के कारण कई किसान और मछुआरा समुदाय के लोग आर्थिक, मानसिक और सामाजिक शोषण का सामना कर रहे हैं।
ज्ञापन में बताया गया कि इस गंभीर मामले को लेकर संगठन पहले भी तहसील प्रशासन को लिखित रूप से अवगत करा चुका है, लेकिन अब तक न तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हुई और न ही पीड़ित किसानों को कोई राहत या मुआवजा दिया गया।
भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रशासन द्वारा इस मामले में संज्ञान लेकर सकारात्मक वार्ता के माध्यम से समस्या का समाधान नहीं किया गया तो संगठन 9 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेगा।
किसान नेताओं का कहना है कि सरकार किसानों और मछुआरा समुदाय के हितों की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही इन दावों की पोल खोल रही है। किसानों ने साफ कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी तहसील प्रशासन बिसवां की होगी।
किसानों के इस ऐलान के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन किसानों की मांगों पर कब और क्या कार्रवाई करता है।
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