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"साधना के बिना संसाधन महत्वहीन": स्वामी चिन्मयानंद ने मेधावियों को दिया सफलता का मंत्र; वाणिज्य संकाय में प्रतिभाओं का सम्मान


[ विशेष कवरेज: सम्मान समारोह | मुमुक्षु शिक्षा संकुल ]

ब्यूरो रिपोर्ट: योगेंद्र सिंह यादव (स्टेट ब्यूरो हेड), उत्तर प्रदेश ✍️

शाहजहाँपुर | 08 मई, 2026 सच की आवाज वेब न्यूज़ - शिक्षा जगत

मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता **स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती** ने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि केवल कक्षाओं तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि "मैं कर सकता हूँ" का भाव ही जीवन पथ पर असली प्रेरणा देता है। वाणिज्य संकाय द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में विद्यार्थियों को आशीर्वचन देते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि साधना के बिना संसाधनों का कोई मूल्य नहीं है।

स्वामी जी के उद्बोधन के मुख्य अंश:
चुनौती और साहस: प्रत्येक अवसर अपने साथ चुनौतियां लेकर आता है, जिन्हें स्वीकार करने का साहस ही मंजिल तक पहुँचाता है।
वैश्विक पहचान: जब तक विद्यार्थी वैश्विक पटल पर अपना स्थान न बना पाएं, तब तक उनकी डिग्रियां अधूरी हैं।
कर्तव्य पथ: विद्यार्थियों को अपने पीछे कर्तव्य का एक अद्वितीय पथ छोड़ना चाहिए।

मेधावियों का गौरव: समारोह के दौरान विषम सेमेस्टर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। एम.कॉम. में शगुन गुप्ता व दक्ष अग्रवाल तथा बी.कॉम. में आकर्षी रावत, अनुराग गुप्ता और श्रेया यादव ने अपने-अपने सेमेस्टर में प्रथम स्थान प्राप्त कर संस्थान का मान बढ़ाया। इसके साथ ही प्रबंधकीय विकास एवं वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।

गणमान्य उपस्थिति:
इस अवसर पर पूर्व प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र, संकायाध्यक्ष प्रो. अनुराग अग्रवाल, विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जयशंकर ओझा सहित प्रो. देवेंद्र सिंह, डॉ. अर्चना गर्ग और बड़ी संख्या में प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. शिशिर शुक्ला द्वारा किया गया।

"सच की आवाज वेब न्यूज़" मेधावी छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य की कामना करता है और शैक्षणिक उत्कृष्टता की ऐसी खबरों को प्राथमिकता से आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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