शाहजहाँपुर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां एक ओर कड़े सुशासन और शून्य भ्रष्टाचार की कलेक्टिव नीति का डंका पीट रही है, वहीं दूसरी ओर जनपद शाहजहाँपुर में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग (ICDS) के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी सरकार की साख को कड़ाई से बट्टा लगाने में जुटे हैं। जनपद की अधिकांश बाल विकास परियोजनाओं में इन दिनों भारी कलेक्टिव धांधली और भ्रष्टाचार का विलेख सामने आ रहा है। स्थानीय जनमानस का आरोप है कि जिले की पुवायाँ, खुटार और बंडा सहित लगभग १० प्रमुख बाल विकास परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाले अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र परमानेंट बंद रहते हैं, जिससे नौनिहालों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले सरकारी पोषाहार का खुलेआम बंदरबांट किया जा रहा है।
विलेख के अनुसार, इस लचर व्यवस्था के पीछे विभागीय अधिकारियों की कड़क लापरवाही और मनमाना कमान रवैया मुख्य वजह है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर न तो बच्चे पहुंच रहे हैं और न ही पुष्टाहार का कलेक्टिव वितरण सुनिश्चित हो पा रहा है। विभागीय अधिकारियों की कलाई तब खुलती है जब धरातल पर जांच की बात आती है। लोगों का सीधा आरोप है कि यदि जनपद की समस्त बाल विकास परियोजनाओं के अभिलेखों और जमीनी हकीकत की कड़ाई से निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो करोड़ों रुपये का पोषाहार घोटाला पूरी कलेक्टिव वास्तविकता के साथ सामने आ जाएगा।
• 🛑 १० कलेक्टिव परियोजनाएं प्रभावित: शाहजहाँपुर की पुवायां, खुटार, बंडा, भावल खेड़ा, परौर, कलान, खुदागंज, अल्लाहगंज और सिधौली जैसी अधिकांश परियोजनाओं में कमान व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
• 🎒 बंद केंद्र व कागजी वितरण: इन अंचलों में आंगनबाड़ी केंद्र केवल कागजों पर संचालित हो रहे हैं। मौके पर तालाबंदी रहने से पोषाहार की कालाबाजारी कर उसे कड़ाई से खुर्द-बुर्द किया जा रहा है।
• 🚗 गैर-जनपदीय 'अप-डाउन' संस्कृति: विलेखीय सूत्रों के अनुसार, इन परियोजनाओं में तैनात अधिकांश मुख्य अधिकारी और कर्मचारी गैर-जनपदों (बाहरी जिलों) के निवासी हैं, जो केवल खानापूर्ति करने हेतु ड्यूटी पर आते हैं और मुख्यालय पर कलेक्टिव निवास न करके दैनिक अप-डाउन करते हैं।
• 🏛️ 'भयमुक्त' भ्रष्टाचार का संकट: आम जनता का कड़ा मलाल है कि योगी सरकार की कड़क नीतियों के बावजूद निचले स्तर के अधिकारी पूरी तरह भयमुक्त होकर अपनी मनमर्जी चला रहे हैं, जिससे जनता का भरोसा टूट रहा है।
| 📍 रडार पर आईं प्रभावित कमान परियोजनाएं | 🎯 जनहित मांग एवं कलेक्टिव विलेख एजेंडा |
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• बाल विकास परियोजना: पुवायाँ व खुटार • बाल विकास परियोजना: बंडा व भावल खेड़ा • बाल विकास परियोजना: परौर व कलान • बाल विकास परियोजना: खुदागंज, अल्लाहगंज व सिधौली |
• उच्चाधिकारियों द्वारा स्थलीय विलेखीय सघन औचक निरीक्षण हो। • पोषाहार वितरण का कलेक्टिव बायोमेट्रिक/डिजिटल सत्यापन कराया जाए। • गैर-जनपद से कमान संभालने वाले कर्मियों की मुख्यालय कस्टडी निवास अनिवार्यता की कड़ाई से जांच हो। |
इस गंभीर विभागीय घालमेल को लेकर अब आम जनता शासन और जिला प्रशासन के कड़े कमान एक्शन की ओर टकटकी लगाए देख रही है। लोगों का सवाल है कि क्या सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी महाराज और जिला प्रशासन इस समूचे कलेक्टिव प्रकरण की एक निष्पक्ष मजिस्ट्रेट जांच करवाकर बाल विकास पुष्टाहार की मूल सुशासन व्यवस्था में कड़ा सुधार लाने का कलेक्टिव प्रयास करेंगे?
"शाहजहाँपुर की १०-१० बाल विकास परियोजनाओं में पुष्टाहार वितरण का ठप होना और आंगनबाड़ी केंद्रों का परमानेंट बंद रहना, सूबे की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को जमीनी स्तर पर दी गई कड़ी कलेक्टिव चुनौती है। कुपोषण के खिलाफ छिड़ी कमान जंग में बच्चों के हिस्से का निवाला यदि विभागीय सांठगांठ की भेंट चढ़ रहा है, तो यह कृत्य अक्षम्य और विलेखीय अपराध की श्रेणी में आता है। अधिकारियों का गैर-जनपद से आकर औपचारिकता निभाना प्रशासनिक ढीलेपन का कड़ा सुबूत है। जिला मजिस्ट्रेट व मुख्य विकास अधिकारी को इस कलेक्टिव विलेख का त्वरित संज्ञान लेते हुए एक व्यापक कमान जांच कमेटी गठित करनी चाहिए, ताकि दोषी अधिकारियों को कड़ाई से उत्तरदायी बनाकर व्यवस्था को परमानेंट सुधारा जा सके।"
'सच की आवाज' वेब न्यूज के माध्यम से हमारे कमान कलेक्टिव स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव ने इस भ्रष्टाचार और जनहित विरोधी विभागीय विलेख की कड़क पड़ताल करते हुए बताया कि शाहजहाँपुर का जिला प्रशासन इस पोषाहार कमान बंदरबांट को रोकने के लिए क्या कड़ा एक्शन प्लान तैयार करता है, इस पर हमारी कलेक्टिव नजर पूरी कड़ाई से बनी रहेगी।
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