ब्यूरो रिपोर्ट सुधीर सिंह कुम्भाणी सीतापुर ✍️
सीतापुर। विकासखंड सकरन में ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में निर्माण सामग्री की कथित आपूर्ति और भुगतान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ फर्मों के माध्यम से सीमेंट, सरिया, मौरंग, बालू, ईंट, इंटरलॉकिंग एवं अन्य सामग्री की लाखों रुपये की सप्लाई कागजों पर दर्शाकर भुगतान कराया गया, जबकि संबंधित फर्मों की वास्तविक खरीद और स्टॉक का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, सकरन क्षेत्र में करीब 30 से 35 फर्मों पर वास्तविक खरीद के बिना सामग्री आपूर्ति दर्शाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि लाखों रुपये की निर्माण सामग्री वास्तव में खरीदी और सप्लाई की गई है तो संबंधित फर्मों के पास खरीद बिल, स्टॉक रजिस्टर, परिवहन अभिलेख, जीएसटी दस्तावेज और अन्य संबंधित रिकॉर्ड मौजूद होने चाहिए। इन अभिलेखों के सत्यापन से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
आरोप यह भी हैं कि कुछ ऐसे प्रतिष्ठानों के नाम पर निर्माण सामग्री की भारी मात्रा में आपूर्ति दिखाई गई, जिनका मुख्य कारोबार फोटोकॉपी, स्टेशनरी अथवा अन्य सेवाओं से जुड़ा बताया जाता है। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला गंभीर वित्तीय अनियमितता और फर्जी बिलिंग से जुड़ा हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने विकास कार्यों में इस्तेमाल हुई सामग्री की मात्रा और गुणवत्ता का भी स्थलीय सत्यापन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भुगतान से संबंधित बिलों के साथ वास्तविक कार्यस्थल पर इस्तेमाल सामग्री का मिलान कराया जाना जरूरी है।
ग्रामीणों एवं सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। मांग की गई है कि संबंधित फर्मों के खरीद रिकॉर्ड, स्टॉक, जीएसटी विवरण, परिवहन अभिलेख एवं वास्तविक व्यवसाय का सत्यापन कराया जाए।
यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग या फर्जी बिलिंग की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं एवं अन्य जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई और सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित किए जाने की मांग की गई है।
