कुलपति ने किया ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन सोशल साइंस रिसर्च’ पुस्तक का विमोचन

 

पुस्तक विमोचन करते कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️

सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में एआई के उपयोग, संभावनाओं और चुनौतियों पर केंद्रित है पुस्तक

शाहजहांपुर। स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय में सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग, संभावनाओं और चुनौतियों पर केंद्रित पुस्तक “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन सोशल साइंस रिसर्च : मेथड्स, एप्लीकेशंस एंड चैलेंजेज” का विमोचन कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह ने किया।

पुस्तक का संपादन नेहरू मेमोरियल शिवनारायण दास कॉलेज, बदायूं के व्यवसाय प्रशासन विभाग के डॉ. प्रवेंद्र दीक्षित एवं समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष कैप्टन (डॉ.) संतोष कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से किया है।

पुस्तक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सामाजिक विज्ञान अनुसंधान से जुड़े विभिन्न आयामों पर विद्वानों द्वारा प्रस्तुत शोध कार्यों को शामिल किया गया है। प्राप्त 27 शोध पत्रों में से विषय की प्रासंगिकता, गुणवत्ता एवं शोधपरक महत्त्व के आधार पर 10 शोध पत्रों का चयन कर उन्हें पुस्तक में प्रकाशित किया गया है।

एआई शोध का विकल्प नहीं, क्षमताओं को विस्तार देने वाला उपकरण

इस अवसर पर कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रही है।

उन्होंने कहा कि शोध की गुणवत्ता, गति और विश्लेषण क्षमता को बेहतर बनाने में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि इसके उपयोग के दौरान शोधकर्ताओं को अकादमिक नैतिकता, मौलिकता, तथ्यपरकता और मानवीय विवेक का विशेष ध्यान रखना होगा।

कुलपति ने कहा कि एआई शोधकर्ता का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी क्षमताओं को विस्तार देने वाला प्रभावी उपकरण है। सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में इसका जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग समाज की जटिल समस्याओं को समझने और उनके समाधान तलाशने में उपयोगी साबित हो सकता है।

विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने पुस्तक के संपादकों को बधाई देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में शोध की पारंपरिक पद्धतियों के साथ आधुनिक तकनीकी साधनों का समन्वय समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक विज्ञान में एआई के प्रयोग पर केंद्रित यह पुस्तक शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विषय के अध्येताओं के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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