आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, शिकायत के बाद बंद हुई कैंटीन फिर शुरू होने का आरोप

 

ब्यूरो रिपोर्ट सीमा मौर्या उन्नाव ✍️

उन्नाव। छोटे चौराहा स्थित शराब के ठेके के ठीक बगल में कथित रूप से संचालित हो रही कैंटीन को लेकर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि शिकायत और खबर प्रकाशित होने के बाद कैंटीन को कुछ दिनों के लिए बंद कराया गया, लेकिन इसके संचालन, संचालक की वैधानिक स्थिति और शराब ठेके के लाइसेंसधारक की भूमिका की गहन जांच नहीं की गई। अब कुछ ही दिनों बाद कैंटीन के दोबारा संचालित होने की बात सामने आई है।

बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले हिंदी दैनिक ‘लखनऊ का अभिमान’ की टीम ने छोटे चौराहा स्थित शराब के ठेके के समीप कैंटीन के संचालन का मामला उठाया था। मामले की शिकायत आबकारी प्रभारी निरीक्षक भवानी प्रताप सिंह से किए जाने की बात भी सामने आई है। शिकायत के बाद कैंटीन को कुछ समय के लिए बंद कराया गया, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार न तो संचालक के खिलाफ स्पष्ट वैधानिक कार्रवाई की गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि कैंटीन किसके द्वारा संचालित की जा रही थी।

शिकायत के बावजूद दोबारा संचालन का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे आबकारी कार्यालय बुलाने का दबाव भी बनाया गया था। इस संबंध में जिलाधिकारी के सीयूजी नंबर पर शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

अब कैंटीन के दोबारा संचालन के आरोप सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि पूर्व में बंद कराई गई कैंटीन आखिर किसकी अनुमति अथवा संरक्षण में दोबारा संचालित हो रही है और संबंधित विभाग द्वारा इसकी नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई।

एमआरपी से अधिक वसूली और शराब उपलब्ध कराने के आरोप

कैंटीन में सामान की बिक्री को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि ग्राहकों से कुछ सामानों के लिए एमआरपी से अधिक कीमत वसूली जा रही है। इसके अलावा यह भी दावा किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति कैंटीन के अंदर बैठकर बाहर से शराब मंगाता है तो उसे निर्धारित कीमत से अधिक रकम लेकर शराब उपलब्ध कराई जाती है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और पुष्टि आवश्यक है। यदि जांच में एमआरपी से अधिक वसूली अथवा शराब की अनधिकृत बिक्री की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति की भूमिका के साथ-साथ शराब ठेके के लाइसेंसधारक की संभावित भूमिका की भी जांच जरूरी होगी।

विभागीय निगरानी पर भी सवाल

सबसे बड़ा सवाल आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। यदि शराब की दुकान के ठीक बगल में कथित अवैध कैंटीन संचालित होती है, शिकायत के बाद उसे बंद कराया जाता है और कुछ ही दिनों में उसके दोबारा शुरू होने की बात सामने आती है, तो विभागीय निरीक्षण और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

यदि जांच में शराब बिक्री से जुड़े नियमों के उल्लंघन अथवा अनधिकृत बिक्री की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही कैंटीन संचालक की वैधानिक स्थिति, शराब ठेके के लाइसेंसधारक की भूमिका तथा पूर्व में की गई शिकायत पर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की भी जांच आवश्यक है।

अब देखना होगा कि उच्चाधिकारी सामने आए आरोपों और शिकायतों का संज्ञान लेकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं।

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