फीस के अभाव में थमने वाली थी LLB की पढ़ाई, ‘सहयोग संस्था’ ने थामा छात्रा का हाथ

11 हजार रुपये की आर्थिक मदद देकर पढ़ाई जारी रखने में किया सहयोग, मां को बुलाकर सौंपी सहायता राशि

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️

शाहजहांपुर। आर्थिक तंगी के चलते एक निर्धन छात्रा की एलएलबी की पढ़ाई फीस के अभाव में रुकने की कगार पर पहुंच गई थी। मुश्किल वक्त में समाजसेवी संस्था ‘सहयोग संस्था’ ने छात्रा की मदद के लिए हाथ बढ़ाया और उसकी फीस के लिए 11 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।

जानकारी के अनुसार छात्रा आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से है और तमाम परेशानियों के बावजूद एलएलबी की पढ़ाई जारी रखे हुए है। फीस जमा करने के लिए पर्याप्त धनराशि न होने के कारण उसकी पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया था। महानगर के कुछ समाजसेवियों के माध्यम से छात्रा की स्थिति की जानकारी सहयोग संस्था के पदाधिकारियों तक पहुंची।

संस्था ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छात्रा की आर्थिक स्थिति और पात्रता की जानकारी जुटाई। जरूरतमंद पाए जाने के बाद संस्था की ओर से तत्काल आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया गया।

इसके बाद छात्रा की मां निर्मला देवी को बुलाकर संस्था की ओर से 11 हजार रुपये की सहायता राशि सौंपी गई। आर्थिक मदद मिलने के बाद छात्रा की पढ़ाई जारी रखने का रास्ता साफ हुआ।

जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद का प्रयास

संस्था के संस्थापक अनिल गुप्ता प्रधान और शाहनवाज खां एडवोकेट ने कहा कि संस्था का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र लोगों तक सहायता पहुंचाना है। जहां भी संस्था की आवश्यकता होगी, वहां पहुंचकर सहयोग करने का प्रयास किया जाएगा।

अध्यक्ष स्तुति गुप्ता और महासचिव सरदार हरजीत सिंह ने बताया कि छात्रा की आर्थिक स्थिति की जानकारी मिलने के बाद संस्था ने पहले पूरी जानकारी जुटाई और पात्र पाए जाने पर तत्काल सहायता का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक परेशानी के कारण किसी जरूरतमंद विद्यार्थी की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए, इसके लिए समाज के सक्षम लोगों को भी आगे आना चाहिए।

इस दौरान अध्यक्ष स्तुति गुप्ता, महासचिव सरदार हरजीत सिंह, डायरेक्टर शालू यादव, रुचि गुप्ता, अलका गुप्ता, शिवम वर्मा, रीमा गुप्ता सहित संस्था के पदाधिकारी मौजूद रहे।

आर्थिक तंगी के बीच मिली यह मदद छात्रा के लिए महज 11 हजार रुपये की सहायता नहीं, बल्कि उसकी शिक्षा और भविष्य के सपनों को आगे बढ़ाने का सहारा बनी।

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