स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहांपुर। आयुर्वेद दिवस की इस वर्ष की थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर स्थित इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी कार्यालय में बैठक आयोजित की गई। इसमें आयुर्वेद के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली और जनस्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष एवं इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी शाखा शाहजहांपुर के सचिव तथा बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, झांसी के पूर्व शिक्षक डॉ. विजय जौहरी ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली और जनस्वास्थ्य की अवधारणा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
त्रिदोष, पंचमहाभूत और आयुर्वेद के अष्टांग का किया उल्लेख
डॉ. जौहरी ने 23 सितंबर की तिथि को आयुर्वेद की विभिन्न अवधारणाओं से जोड़ते हुए प्रतीकात्मक व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि 3 को आयुर्वेद के त्रिदोष वात, पित्त और कफ, 2 को समता एवं संतुलन, 5 को पंचमहाभूत, 7 को सप्तधातु और 8 को आयुर्वेद के अष्टांग से प्रतीकात्मक रूप में समझा जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तुलना किसी एक शास्त्रीय सिद्धांत को प्रमाणित करने के लिए नहीं, बल्कि सकारात्मक प्रतीकों के माध्यम से लोगों को अच्छे स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली के प्रति प्रेरित करने का प्रयास है।
तिरंगे और स्वास्थ्य के प्रतीकात्मक संबंध पर चर्चा
डॉ. जौहरी ने कहा कि तिरंगा राष्ट्रभावना और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उन्होंने इसके तीन रंगों को आयुर्वेद के त्रिदोष से प्रतीकात्मक रूप से जोड़ते हुए कहा कि जिस प्रकार स्वास्थ्य के लिए संतुलन महत्वपूर्ण माना जाता है, उसी प्रकार समाज के विभिन्न वर्गों एवं समुदायों में समन्वय और संतुलन राष्ट्र की शक्ति को मजबूत करता है।
उन्होंने तिरंगे के मध्य स्थित अशोक चक्र की 24 तीलियों का भी भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में उल्लेख किया और कहा कि भारतीय तत्त्वचिंतन में 24 तत्त्वों की अवधारणा मिलती है।
स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ राष्ट्र की ओर
डॉ. जौहरी ने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान और जनजागरूकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सकों का दायित्व है कि इसकी प्रमाणित एवं उपयोगी स्वास्थ्य अवधारणाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने आहार, दिनचर्या, योग, व्यायाम, स्वच्छता और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद दिवस का संदेश केवल आयुर्वेद के प्रचार तक सीमित न रहकर “स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र” की भावना को आगे बढ़ाने वाला होना चाहिए।
23 सितंबर को निर्धारित हुआ आयुर्वेद दिवस
डॉ. जौहरी ने बताया कि भारत सरकार ने मार्च 2025 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से प्रत्येक वर्ष 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाने की तिथि निर्धारित की है। इससे पहले आयुर्वेद दिवस धनतेरस यानी भगवान धन्वंतरि जयंती के अवसर पर मनाया जाता था, जिसकी तारीख हर वर्ष बदलती थी। आयुष मंत्रालय के अनुसार 23 सितंबर की स्थायी तिथि निर्धारित करने का निर्णय 23 मार्च 2025 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से लिया गया था।
बैठक में डॉ. एस.पी. कौशल, डॉ. हितेश गुप्ता, डॉ. रवि सक्सेना तथा जिला चिकित्सालय के आयुष विभाग के चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र कुशवाहा मौजूद रहे। इस दौरान योग एवं आयुर्वेद पर आधारित पत्रिका डॉ. विजय जौहरी को भेंट की गई।
इसके अलावा ओम दिव्यांग कल्याण समिति के बालकृष्ण पांडेय, बृजेश गुप्ता और रवि वर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 23 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही संतुलित जीवनशैली, आहार-विहार, योग, रोग-निवारण और जनस्वास्थ्य में आयुर्वेद की भूमिका के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा।

