कानपुर-लखनऊ हाईवे पर बेशकीमती सरकारी जमीन को लेकर सवाल, शिकायत के एक माह बाद भी जांच अधूरी

 

सुपर स्कूल के सामने जमीन पर निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, बिजली विभाग की भूमि होने का दावा

ब्यूरो रिपोर्ट सीमा मौर्या उन्नाव ✍️

उन्नाव। कानपुर-लखनऊ हाईवे राजमार्ग किनारे बेशकीमती जमीन पर कथित कब्जे और निर्माण को लेकर की गई जन शिकायत के करीब एक माह बाद भी जांच पूरी न होने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी उन्नाव से मामले की दोबारा गंभीरता से जांच कराकर स्पष्ट रिपोर्ट सामने लाने की मांग की है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, सुपर स्कूल के सामने तौफीक के संबंध में संबंधित भूमि को लेकर पूर्व में जन शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सरकारी भूमि पर पक्का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि बिजली विभाग की है। हालांकि, भूमि के वास्तविक स्वामित्व की पुष्टि राजस्व अभिलेखों और संबंधित विभागीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सर्वे विभाग की कथित लापरवाही अथवा मौन स्वीकृति के चलते बेशकीमती सरकारी भूमि पर निर्माण किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के लगभग एक माह बाद भी मामले की जांच पूरी नहीं हुई है और मौके की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।

शिकायत में संबंधित गाटा संख्या और रकबे का उल्लेख करते हुए राजस्व अभिलेखों की जांच कराने तथा मौके पर जाकर भूमि की स्थिति का मिलान कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्माण कार्य जारी रहने के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच तहसीलदार उन्नाव से कराई जाए। साथ ही राजस्व अभिलेखों एवं मौके की स्थिति का मिलान कर यह स्पष्ट किया जाए कि भूमि का वास्तविक स्वामित्व किस विभाग अथवा व्यक्ति के नाम दर्ज है। यदि जांच में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा या निर्माण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब सवाल यह है कि जन शिकायत के करीब एक माह बाद भी जांच अधूरी क्यों है और हाईवे किनारे की बेशकीमती भूमि की वास्तविक स्थिति कब तक स्पष्ट होगी? प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद ही आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकेगी।

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