शिक्षकों की उपस्थिति जांची, बच्चों से सवाल पूछकर परखा शैक्षिक स्तर; कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश
स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहाँपुर, 15 सितंबर 2026। जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने विकासखंड ददरौल के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय बेहटा का औचक निरीक्षण कर विद्यालय की व्यवस्थाओं, शिक्षकों की उपस्थिति, मिड-डे मील की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर का जायजा लिया।
साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण
जिलाधिकारी ने सबसे पहले विद्यालय परिसर एवं कक्षाओं में साफ-सफाई की व्यवस्था देखी। उन्होंने विद्यालय परिसर को स्वच्छ एवं व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि विद्यालय का वातावरण बच्चों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित एवं शिक्षण के अनुकूल होना चाहिए। इस दौरान पेयजल, शौचालय सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की जानकारी लेते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मिड-डे मील की गुणवत्ता परखी
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता की जांच की। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई तथा निर्धारित मानकों के अनुसार बच्चों को भोजन उपलब्ध कराए जाने की जानकारी ली।
उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों को पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए और भोजन तैयार करने के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए।
शिक्षकों की उपस्थिति की भी हुई जांच
जिलाधिकारी ने विद्यालय में शिक्षकों एवं अन्य स्टाफ की उपस्थिति का भी निरीक्षण किया। उन्होंने शिक्षकों को समय से विद्यालय पहुंचने तथा पूरी जिम्मेदारी और मनोयोग से बच्चों को शिक्षित करने के निर्देश दिए।
विद्यालय में अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों की छुट्टी स्वीकृत है या नहीं तथा उनकी अनुपस्थिति की वैधता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए गए।
बच्चों से सवाल पूछकर परखा पढ़ाई का स्तर
जिलाधिकारी ने कक्षाओं में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद किया और उनकी शैक्षिक प्रगति एवं पढ़ाई के स्तर को परखा। उन्होंने बच्चों से विभिन्न प्रश्न पूछे तथा छात्राओं से पहाड़े भी सुने। बच्चों द्वारा दिए गए उत्तरों के आधार पर उन्होंने शिक्षण की गुणवत्ता का जायजा लिया।
उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की बुनियादी शैक्षिक दक्षताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
तेज बच्चों को कमजोर विद्यार्थियों के साथ पढ़ाने की सलाह
डीएम ने कहा कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता अलग-अलग होती है। इसलिए पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों का समूह बनाकर उन्हें अन्य विद्यार्थियों के साथ पढ़ाई एवं अभ्यास कराया जाए। इससे बच्चों में आपसी सहयोग की भावना विकसित होने के साथ-साथ अपेक्षाकृत कमजोर विद्यार्थियों की शैक्षिक स्थिति में भी सुधार होगा।
उन्होंने शिक्षकों को निर्देशित किया कि बच्चों को केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनकी समझ, तार्किक क्षमता एवं व्यवहारिक ज्ञान विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
कमजोर विद्यार्थियों की प्रगति की नियमित समीक्षा के निर्देश
जिलाधिकारी ने बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ अभिभावकों से लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों का शैक्षिक स्तर अपेक्षाकृत कमजोर है, उनके लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएं और उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा हो।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विद्यालयों में शिक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने शिक्षकों से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की अपेक्षा की।
निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने विद्यालय की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों एवं शिक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए तथा शासन की मंशा के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ वातावरण और बच्चों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
