चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए मेडिकल कॉलेज के मानव शरीर रचना विभाग को समर्पित किया गया पार्थिव शरीर
स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहाँपुर, 15 सितंबर 2026। मानव सेवा और समाज के प्रति अपने दायित्व की भावना को जीवन के बाद भी आगे बढ़ाते हुए स्वर्गीय श्रीमती मधुबाला शुक्ला ने देहदान कर प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके निधन के बाद उनकी पूर्व इच्छा का सम्मान करते हुए परिजनों ने उनका पार्थिव शरीर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, शाहजहाँपुर के मानव शरीर रचना विभाग (एनाटॉमी विभाग) को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के उद्देश्य से समर्पित किया।
परिजनों ने पूरी की उनकी इच्छा
स्वर्गीय मधुबाला शुक्ला के पति श्री संजीव कुमार शुक्ला एवं पुत्र श्री शोभित शुक्ला ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए 15 सितंबर 2026 को उनका पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज के मानव शरीर रचना विभाग को सौंपा।
मेडिकल कॉलेज के अनुसार, देहदान का उद्देश्य मृत्यु के बाद भी मानवता और चिकित्सा शिक्षा की सेवा में योगदान देना है। उनका शरीर भावी चिकित्सकों के अध्ययन का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
भावी चिकित्सकों की शिक्षा में मिलेगा योगदान
देहदान के माध्यम से मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की विभिन्न संरचनाओं का प्रत्यक्ष एवं वैज्ञानिक अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। इससे चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के व्यवहारिक ज्ञान एवं प्रशिक्षण को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
चिकित्सा महाविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार मानव शरीर रचना को बेहतर ढंग से समझने के लिए देहदान चिकित्सा शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। देहदान करने वाले व्यक्ति और उनके परिवार का योगदान भावी चिकित्सकों के प्रशिक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
मेडिकल कॉलेज में दी गई श्रद्धांजलि
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सरोज कुमार एवं मानव शरीर रचना विभाग के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार सक्सेना के समन्वय एवं सहयोग से देहदान की प्रक्रिया संपन्न हुई।
इस अवसर पर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, शाहजहाँपुर के चिकित्सकों एवं मेडिकल विद्यार्थियों ने स्वर्गीय मधुबाला शुक्ला को श्रद्धांजलि अर्पित की। विभाग की ओर से उनके परिवार के प्रति सम्मान एवं आभार व्यक्त किया गया।
‘देहदान भावी चिकित्सकों की शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान’
मानव शरीर रचना विभाग के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार सक्सेना, डॉ. राहुल पालीवाल एवं अन्य चिकित्सा शिक्षकों ने कहा कि मानव शरीर रचना को समझने के लिए देहदान का विशेष महत्व है। देहदान करने वाले व्यक्ति और उनके परिवार का योगदान भावी चिकित्सकों के प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्वर्गीय मधुबाला शुक्ला का यह योगदान चिकित्सा शिक्षा एवं मानव सेवा के माध्यम से लंबे समय तक स्मरण किया जाएगा। उनका देहदान समाज में त्याग, सेवा, प्रेरणा और मानव कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला उदाहरण है।
