विश्वविद्यालय को मिली एआईयू की सदस्यता, नॉर्थ जोन में मिली जगह

 

स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय शैक्षणिक पहचान को मिली मजबूती, विद्यार्थियों व शिक्षकों को अंतर-विश्वविद्यालयीय गतिविधियों में बढ़ेंगे अवसर

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️

शाहजहांपुर। स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के नाम एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) ने विश्वविद्यालय को अपनी सदस्यता प्रदान की है। एआईयू की ओर से विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह को भेजे गए पत्र के माध्यम से सदस्यता की औपचारिक जानकारी दी गई है।

एआईयू की महासचिव डॉ. (श्रीमती) पंकज मित्तल द्वारा जारी पत्र के अनुसार, एसोसिएशन ने स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के सदस्यता आवेदन पर विचार करने के बाद 31 जुलाई 2026 से प्रभावी सदस्यता प्रदान करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय को एआईयू के नॉर्थ जोन में स्थान दिया गया है।

राष्ट्रीय स्तर की गतिविधियों में बढ़ेंगे अवसर

एआईयू देश के विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक समन्वय, अंतर-विश्वविद्यालय सहयोग, शासन एवं विश्वविद्यालयों के बीच संपर्क, उच्च शिक्षा से जुड़े अकादमिक आदान-प्रदान तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण मंच है।

विश्वविद्यालय को एआईयू की सदस्यता मिलने से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय स्तर की अंतर-विश्वविद्यालयीय गतिविधियों में भागीदारी के नए अवसर मिलने की संभावना है। विशेष रूप से युवा महोत्सव, खेलकूद, शोध, अकादमिक सम्मेलनों तथा विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय की सहभागिता का दायरा बढ़ सकता है।

यूजीसी की 2(एफ) मान्यता भी मिल चुकी

उल्लेखनीय है कि स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय को इससे पहले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की धारा 2(एफ) के अंतर्गत मान्यता भी प्राप्त हो चुकी है। ऐसे में एआईयू की सदस्यता को विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय शैक्षणिक पहचान को और मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

कुलपति ने बताया महत्वपूर्ण पड़ाव

कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह ने एआईयू की सदस्यता मिलने को विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि एआईयू की सदस्यता विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय उच्च शिक्षा परिदृश्य से और अधिक मजबूती से जोड़ने में सहायक होगी। साथ ही इससे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा और अकादमिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के नए अवसर प्राप्त होंगे।

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