मशरूम उत्पादन से बदली किसान की तकदीर, कम लागत में सत्यपाल ने कमाई बेहतर आमदनी

 

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️

200 वर्ग फीट की लो-कॉस्ट इकाई लगाकर पहली बार में करीब एक लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा, अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणास्रोत

शाहजहांपुर। पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जनपद शाहजहांपुर के ग्राम मथाना, विकासखंड मदनापुर, तहसील तिलहर निवासी प्रगतिशील किसान सत्यपाल पुत्र ब्रजलाल ने मशरूम उत्पादन को अपनाकर खेती में नई संभावनाओं की मिसाल पेश की है।

सत्यपाल पहले पारंपरिक तरीके से धान, गेहूं और गन्ने की खेती करते थे। खेती की बढ़ती लागत और सीमित आमदनी के बीच उन्होंने आधुनिक एवं कम लागत वाली खेती की ओर कदम बढ़ाया। इसी क्रम में उन्होंने उद्यान विभाग से संपर्क कर एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत मशरूम उत्पादन योजना की जानकारी ली।

विभागीय मार्गदर्शन से स्थापित की लो-कॉस्ट यूनिट

जिला उद्यान अधिकारी पुनीत कुमार पाठक द्वारा उन्हें मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए संचालित योजना की जानकारी दी गई। योजना के तहत 200 वर्ग फीट की अस्थायी मशरूम उत्पादन इकाई के निर्माण के लिए अधिकतम एक लाख रुपये तक का प्रावधान बताया गया।

सत्यपाल ने विभागीय मार्गदर्शन में अपने प्रक्षेत्र पर लो-कॉस्ट मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया और आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराए। योजना प्रभारी अनिल कुमार द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

विभागीय जानकारी के अनुसार, लो-कॉस्ट मशरूम कार्यक्रम के तहत एक इकाई की कुल लागत लगभग दो लाख रुपये आई। परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक अनुदान के प्रावधान के तहत उद्यान विभाग की ओर से सत्यपाल को एक लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया।

पहली बार में करीब एक लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा

सत्यपाल ने अपनी मशरूम उत्पादन इकाई में पहली बार उत्पादन किया। उनके अनुसार इस उत्पादन में करीब 1.75 लाख रुपये की लागत आई और सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें लगभग एक लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हुआ।

मशरूम उत्पादन से मिली सफलता के बाद उनकी लो-कॉस्ट इकाई आसपास के किसानों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी है। कम भूमि और नियंत्रित वातावरण में उत्पादन की सुविधा के कारण क्षेत्र के अन्य किसान और युवा भी इस व्यवसाय की ओर रुचि दिखा रहे हैं।

जनपद में मशरूम उत्पादन का बढ़ रहा दायरा

विभागीय जानकारी के अनुसार जनपद में संचालित 8 मशरूम उत्पादन इकाइयों से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। नई इकाइयों को मंजूरी मिलने के बाद जनपद में मशरूम उत्पादन का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

मशरूम उत्पादन की खासियत कम भूमि में उत्पादन और नियंत्रित वातावरण में खेती करना है। किसानों को मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण के संबंध में तकनीकी जानकारी देने के लिए राज्य मशरूम प्रयोगशाला, राजकीय शीतगृह परिसर सेक्टर-जी, अलीगंज, लखनऊ तथा कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

सरकारी योजनाओं से किसानों का बढ़ रहा भरोसा

जिला उद्यान अधिकारी पुनीत कुमार पाठक की ओर से किसानों को उद्यान विभाग की योजनाओं की जानकारी देने, आवेदन प्रक्रिया में सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में किसानों को आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उद्यान विभाग द्वारा औद्यानिक विकास योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ उनके क्रियान्वयन की समीक्षा भी की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक किसान योजनाओं का लाभ उठा सकें।

अन्य किसानों के लिए बनी प्रेरणा

सत्यपाल की सफलता यह दर्शाती है कि पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक एवं विविध कृषि गतिविधियों को अपनाकर किसान अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं। मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियों में कम भूमि की आवश्यकता होने के कारण छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी नई संभावनाएं बन सकती हैं।

सत्यपाल की कहानी क्षेत्र के उन किसानों के लिए प्रेरणादायक है, जो खेती में नई तकनीक अपनाकर बेहतर आमदनी हासिल करना चाहते हैं। सरकारी योजना, विभागीय मार्गदर्शन और किसान की मेहनत के समन्वय से “आत्मनिर्भर किसान, समृद्ध प्रदेश” की दिशा में कदम आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

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