अवैध रूप से 167 नग सागौन के बोटे और पांच कुंतल जलौनी लकड़ी से लदा ट्रक पकड़ा, दो गिरफ्तार

 


ब्यूरो रिपोर्ट प्रमोद मिश्रा

बलरामपुर। वन विभाग और रेहरा बाजार पुलिस की संयुक्त टीम ने इटवा जंगल के पास चेकिंग के दौरान अवैध लकड़ी से लदे ट्रक को पकड़कर बड़ी कार्रवाई की। ट्रक से 167 नग सागौन के बोटे और करीब पांच कुंतल जलौनी लकड़ी बरामद की गई। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, पुलिस अधीक्षक मार्तण्ड प्रकाश सिंह के निर्देशन में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पाण्डेय एवं क्षेत्राधिकारी उतरौला डॉ. जितेन्द्र कुमार के पर्यवेक्षण तथा थानाध्यक्ष रेहरा बाजार अनिल कुमार दीक्षित के नेतृत्व में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की।

बताया गया कि 04 अक्टूबर 2026 की रात पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि शहजौरा की तरफ से ग्रामीण क्षेत्र एवं जंगल से चोरी से काटी गई लकड़ी एक ट्रक में लादकर मनकापुर की ओर ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर उप क्षेत्रीय वनाधिकारी अशोक कुमार पाण्डेय, वन रक्षक राजेश्वर दत्त तिवारी और चालक अवधेश कुमार गुप्ता के साथ संयुक्त टीम ने इटवा जंगल के पास वाहनों की चेकिंग शुरू की।

इसी दौरान मनकापुर की ओर जाता हुआ ट्रक संख्या UP51 AT 3840 दिखाई दिया। पुलिस और वन विभाग की टीम ने टॉर्च की रोशनी से ट्रक को रोककर तलाशी ली। जांच के दौरान ट्रक में 167 नग सागौन के बोटे तथा करीब पांच कुंतल जलौनी लकड़ी लदी मिली। लकड़ी के संबंध में वैध ट्रांजिट पास मांगा गया, लेकिन चालक और उसके साथी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

पुलिस ने मौके से रामकुमार पुत्र पवन कुमार निवासी नई बस्ती बैरिपुर, थाना मनकापुर, जनपद गोंडा तथा संतोष सिंह उर्फ शक्ति सिंह पुत्र अर्जुन सिंह निवासी ग्राम बैरिया सुरजनपुर, थाना रेहरा बाजार, जनपद बलरामपुर को गिरफ्तार किया।

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों आरोपियों ने कथित रूप से बताया कि वे मिलकर सरकारी जंगल और ग्रामीण क्षेत्रों से सागौन की लकड़ी काटकर शहर में बेचते थे। पुलिस ने ट्रक और बरामद लकड़ी को कब्जे में लेते हुए आरोपियों के विरुद्ध थाना रेहरा बाजार में मु0अ0सं0 239/2026 के तहत धारा 303(2)/317(2) बीएनएस, वृक्ष संरक्षण अधिनियम की धारा 4/10, उत्तर प्रदेश वन उपज अभिवहन नियमावली 1978 की धारा 3/28 तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26/52 के तहत मुकदमा दर्ज कर आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

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