ब्यूरो रिपोर्ट राहुल कुमार, लखनऊ ✍️
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के मौन्दा गांव में आयोजित 94 साल पुरानी रामलीला में तीसरे दिन सीता हरण की लीला का भव्य मंचन किया गया। स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इस धार्मिक आयोजन को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचे। रामलीला में सूर्पनखा की नाक काटने से लेकर खर-दूषण वध और सीता हरण तक की लीला का सजीव मंचन किया गया।
लक्ष्मण ने काटी सूर्पनखा की नाक, श्रीराम ने किया खर-दूषण का वध
रामलीला के तीसरे दिन मंचन की शुरुआत सूर्पनखा प्रसंग से हुई। लक्ष्मण जी द्वारा सूर्पनखा की नाक काटे जाने के बाद जब यह खबर खर और दूषण नामक राक्षसों तक पहुंची, तो वे भगवान श्रीराम से युद्ध करने पहुंचे। युद्ध के दौरान भगवान श्रीराम ने दोनों राक्षसों का वध कर दिया।
खर-दूषण के वध की खबर जब लंकापति रावण तक पहुंची, तो वह क्रोधित हो उठा और बदला लेने के लिए माता सीता के हरण की योजना बनाने लगा।
सोने के हिरण के मोह में हुआ सीता हरण
रामलीला में दिखाया गया कि रावण ने मारीच को सोने का हिरण बनकर जाने के लिए कहा। स्वर्ण हिरण को देखकर माता सीता ने उसे पाने की इच्छा जताई और भगवान श्रीराम से उसे लाने का आग्रह किया। भगवान श्रीराम हिरण के पीछे चले गए। इसी दौरान अवसर पाकर रावण ने माता सीता का हरण कर लिया।
इस प्रसंग के मंचन ने दर्शकों को रामायण की महत्वपूर्ण घटना से रूबरू कराया। वहीं, खर-दूषण के 21 फीट ऊंचे पुतलों का दहन कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा। पुतला दहन देखने के लिए भी लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया।
स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति बनी आकर्षण
बताते चलें कि मौन्दा गांव की यह रामलीला 94 वर्षों से चली आ रही है। इसकी खास बात यह है कि इसमें गांव के स्थानीय कलाकार ही विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाते हैं। आयोजकों और ग्रामीणों के सहयोग से आयोजित होने वाली यह रामलीला क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह लखनऊ की एकमात्र ऐसी रामलीला बताई जाती है, जिसका मंचन संगीतरूपक शैली में नक्कारे के साथ किया जाता है। तीसरे दिन की लीला में हजारों लोगों ने पहुंचकर मंचन का आनंद लिया और भगवान श्रीराम के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठा।
